नोएडा: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र को नोटिस, बाद में निरस्त किया

नोएडा: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र को नोटिस, बाद में निरस्त किया

नोएडा: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र को नोटिस, बाद में निरस्त किया
Modified Date: September 8, 2026 / 03:18 pm IST
Published Date: September 8, 2026 3:18 pm IST

नोएडा, आठ सितंबर (भाषा) ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कथित रूप से शामिल होने के मामले में नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि छात्र से शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया है।

छात्र अक्षत त्रिपाठी ने हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से भाग लिया था और उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था।

यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत चार सितंबर को जारी किया गया। इससे पहले सहायक पुलिस आयुक्त की अदालत के माध्यम से कानून की धारा 126 और 135 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी।

नोटिस में त्रिपाठी से पूछा गया कि क्यों न उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया जाए और इसके लिए उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही राशि के दो स्थानीय सक्षम जमानतदार पेश करने को कहा जाए। इस मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।

इकोटेक-1 थाने के उपनिरीक्षक शिव पांडेय की ओर से तैयार और थाना प्रभारी द्वारा अग्रेषित पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज के झूंसी के मूल निवासी त्रिपाठी वर्तमान में इकोटेक-1 क्षेत्र में रह रहे हैं और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र हैं।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को एक राजनीतिक दल द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था और भ्रामक तथा सरकार विरोधी विमर्श प्रसारित कर रहा था।

पुलिस ने दावा किया कि उसकी गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी।

हालांकि, मंगलवार को इकोटेक थाने की पुलिस ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद चार सितंबर को ही नोटिस निरस्त कर दिया गया और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन में भाग लिया था। उसने दावा किया कि वह उस समय विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था क्योंकि संस्थान लगभग तीन महीने से बंद था।

त्रिपाठी ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हो गया था।

‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे ‘‘दमनकारी’’ बताया और उत्तर प्रदेश सरकार व पुलिस की आलोचना की।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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