‘दुर्लभतम मामला नहीं’: दिल्ली की अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा देने से इनकार किया

‘दुर्लभतम मामला नहीं’: दिल्ली की अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा देने से इनकार किया

‘दुर्लभतम मामला नहीं’: दिल्ली की अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा देने से इनकार किया
Modified Date: May 26, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: May 26, 2026 8:42 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी व्यक्ति को मौत की सजा देने से इनकार कर दिया और कहा कि यह घटना ‘‘दुर्लभतम’’ श्रेणी में नहीं आती।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने यह टिप्पणी दोषी सनी कुमार की सजा की अवधि तय करने संबंधी दलीलों को सुनते समय की और 22 वर्षीय दोषी को मृत्युपर्यंत यानी उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास की सजा सुनाई।

अदालत के आदेश में कहा गया, ‘‘ इस अदालत का यह मत नहीं है कि वर्तमान मामला ‘दुर्लभतम से भी दुर्लभ’ मामलों की श्रेणी में आता है। दोषी की कम उम्र को देखते हुए और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है इसलिए इस मामले में मृत्युदंड उचित नहीं है।’’

अदालत ने 30 अप्रैल को कुमार को एक बच्ची के अपहरण और बलात्कार के लिए दोषी ठहराया और कहा कि बच्ची को इतनी गंभीर और जानलेवा चोटें आई थीं जो केवल यौन उत्पीड़न से ही हो सकती थीं।

अदालत ने कहा कि कुमार का ‘पैशाचिक’ आचरण दर्शाता है कि वह समाज के लिए एक गंभीर खतरा है और किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं है।

आदेश में कहा गया , ‘‘हालांकि दोषी को मृत्युदंड देने पर विचार नहीं किया जा रहा है, फिर भी इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उसके कुकर्म पैशाचिक प्रकृति के हैं और वह किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं है और उसे यथासंभव लंबे समय तक समाज से दूर रखना आवश्यक है।’’

अदालत ने कहा कि बच्ची की पीड़ा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कई ऑपरेशन करवाने और फिर बिस्तर पर पड़े रहने की पीड़ा बेहद कष्टदायक है।

अदालत ने कहा, ‘‘ यदि दोषी इतनी छोटी बच्ची का बलात्कार कर सकता है, तो वह पूरे समाज के लिए एक गंभीर खतरा है और इसलिए उसे जीवन भर सलाखों के पीछे रखा जाना चाहिए।’’

हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष की मृत्युदंड की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि मामला ‘दुर्लभतम’ श्रेणी में नहीं आता है।

अदालत ने यह भी कहा कि दोषी की उम्र 22 वर्ष है, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसने पश्चाताप व्यक्त किया है।

पीड़िता की मां ने अदालत को बताया कि उनकी बेटी की कई सर्जरी हुई हैं और वह तरल आहार पर ही है। उन्होंने कहा कि बच्चे की देखभाल बारी-बारी से करनी पड़ती है, जिसके कारण दोनों माता-पिता बेरोजगार हो गए हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि माता-पिता को उसे बारी-बारी से अपनी गोद में लेना पड़ता है क्योंकि सर्जरी के बाद लड़की न तो खड़ी हो सकती है और न ही बैठ सकती है।

अदालत ने कुमार को पॉक्सो अधिनियम के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई और पीड़ित को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

भाषा शोभना माधव

माधव


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