यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना को लेकर उप्र के मुख्य सचिव, परिवहन मंत्रालय को नोटिस

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यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना को लेकर उप्र के मुख्य सचिव, परिवहन मंत्रालय को नोटिस

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  • Publish Date - September 28, 2026 / 08:01 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 08:01 PM IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने की घटना में नौ लोगों की मौत का संज्ञान लेते हुए सोमवार को परिवहन मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से मामले में जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने आगरा के रहने वाले किशन चंद जैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और परिवहन मंत्रालय को नोटिस जारी किए।

याचिका में 23-24 सितंबर की दरमियानी रात को जेवर के पास बस में आग लगने की घटना के सिलसिले में मुख्य सचिव को एक तय समयसीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

इसमें कहा गया है कि रिपोर्ट में आग लगने की वजह और बस के स्वामित्व, पंजीकरण, परमिट, फिटनेस, बीमा तथा अधिकृत क्षमता के साथ-साथ निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन से जुड़ी जानकारियां भी शामिल की जानी चाहिए।

याचिका में यह निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि पांच से ज्यादा लंबित चालान वाले किसी भी वाहन को किसी भी टोल प्लाजा से गुजरने की इजाजत न दी जाए।

दिल्ली से बिहार जा रही स्लीपर बस में 23-24 सितंबर की दरमियानी रात को उस समय भीषण आग लग गई, जब वह ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर 33 किलोमीटर के माइलस्टोन के पास से गुजर रही थी।

याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार में सार्वजनिक सेवा वाली गाड़ी में सुरक्षित यात्रा करने का अधिकार भी शामिल है, जिसे राज्य ने यात्रियों को ले जाने के लिए उपयुक्त और अधिकृत प्रमाणित किया हो।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के अधिकारियों को ऐसी बसों के लिए की गई सुरक्षा जांच और जारी किए गए परमिट का विवरण देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

भाषा पारुल नरेश

नरेश