Artists Allowance Hike: कलाकारों के लिए खुशखबरी, राज्य सरकार ने बढ़ाया भत्ता, नए साल से पहले मिली बड़ी सौगात
Artists Allowance Hike: कलाकारों के लिए खुशखबरी, राज्य सरकार ने बढ़ाया भत्ता, नए साल से पहले मिली बड़ी सौगात
Artists Allowance Hike
- ओडिशा सरकार ने कलाकारों का मासिक भत्ता बढ़ाया
- 47,704 पारंपरिक कलाकारों को योजना से लाभ मिलेगा
- ‘पाला’ जैसी लोक कलाओं के संरक्षण पर जोर
भुवनेश्वर: Artists Allowance Hike ओडिशा सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कलाकार सहायता योजना’ के तहत लोक और पारंपरिक कला के कलाकारों के मासिक भत्ते में वृद्धि की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार शाम क्योंझर में 48वें राज्य स्तरीय ‘पाला’ सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह घोषणा की।
Artists Allowance Hike संशोधित भत्ते के अनुसार, 40 से 80 वर्ष की आयु के पारंपरिक कला के कलाकारों को अब 2,000 रुपये की मासिक सहायता के बजाय 3,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इनमें ‘पाला’ नाटक में शामिल कलाकार भी शामिल हैं। माझी ने बताया कि इसी प्रकार, 80 वर्ष से अधिक आयु के कलाकारों को 2,500 रुपये के बजाय 3,500 रुपये का मासिक भत्ता मिलेगा। इस पहल से ओडिशा भर के 47,704 कलाकारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे ‘पाला’ जैसी पारंपरिक कलाओं और अन्य सांस्कृतिक रूपों के कलाकारों को आवश्यक वित्तीय सहायता व पहचान मिलेगी।
बढ़ी हुई भत्ता राशि का उद्देश्य ओडिया सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और उसे बढ़ावा देना है और मुख्यमंत्री ने राज्य की विरासत को संरक्षित करने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। माझी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, “यह वृद्धि हमारे उन कलाकारों के समर्पण को एक सहयोग है, जो हमारी समृद्ध परंपराओं की रक्षा और प्रचार करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि उड़िया भाषा के संरक्षण और प्रचार में ‘पाला’ का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पीढ़ियों से उड़िया लोक साहित्य को जीवित रखने के लिए ‘पाला’ कलाकारों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, “इस समृद्ध लोक कला का संरक्षण करना और इसके विकास के लिए काम करना हम सभी का दायित्व व कर्तव्य है।” ‘पाला’ ओडिशा की पारंपरिक लोक कलाओं में से एक है, जिसमें मुख्य कलाकार गायक, कहानी सुनाने, संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से नैतिक संदेश देता है। वह मुख्यतः हिंदू महाकाव्यों व मिथकों का वर्णन करता है, जिनमें अक्सर महाभारत, रामायण और ओडिशा के महाकाव्यों के विषय शामिल होते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने 90 के दशक की शुरुआत में लोगों में सामाजिक संदेश और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए पाला का उपयोग एक माध्यम के रूप में करना शुरू किया था।

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