पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का समाधान ‘बातचीत और कूटनीति’ से ही निकाला जाना चाहिए: राजनाथ सिंह

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का समाधान ‘बातचीत और कूटनीति’ से ही निकाला जाना चाहिए: राजनाथ सिंह

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का समाधान ‘बातचीत और कूटनीति’ से ही निकाला जाना चाहिए: राजनाथ सिंह
Modified Date: March 21, 2026 / 09:50 pm IST
Published Date: March 21, 2026 9:50 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली/हल्द्वानी, 21 मार्च (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है तथा इसका समाधान ‘बातचीत और कूटनीति’ से ही निकाला जाना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार साल पूरे होने के मौके पर यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि युद्ध से कोई समाधान नहीं निकलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ पश्चिम एशिया में निरंतर हमले न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यदि समाधान तक पहुंचना है, उसका मार्ग बातचीत एवं कूटनीति से ही गुजरता है।’’

उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में दुनिया का कोई भी देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता और हो सकता है कि भविष्य में भारत में भी ऊर्जा एवं खाद्य संकट उत्पन्न हो जाए।

सिंह ने कहा कि लेकिन अब तक प्रधानमंत्री ने अपनी योग्यता, क्षमता और सूझबूझ से भारत को उस संकट में फंसने नहीं दिया है लेकिन भविष्य में क्या होगा, कुछ नहीं कहा जा सकता।

रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी पश्चिम एशियाई गैस केंद्रों पर नए हमलों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के मद्देनजर आई है।

बुधवार को ईरान के रणनीतिक दक्षिण पार्स गैस क्षेत्रों पर इजराइल के हमले के बाद ईरान ने कतर के एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) केंद्र रास लाफान समेत कई खाड़ी देशों में महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचनाओं पर तीव्र जवाबी कार्रवाई की।

भारत की एलएनजी आवश्यकता का लगभग 40 प्रतिशत कतर से आता है।

घोराखाल में एक अलग कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध सीमाओं से परे है ।

उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए एक मजबूत सेना की जरूरत है तथा उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के लिए सक्षम नागरिक तैयार हों।

उन्होंने कहा, ‘‘आज के समय में युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तक ​​कि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है।’’

उन्होंने कहा कि जहां प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार रक्षा बलों को विशेष हथियारों और प्रौद्योगिकियों से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, वहीं नागरिकों, विशेषकर युवाओं को अनुशासन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से मानसिक मजबूती और बौद्धिक स्पष्टता विकसित करने की आवश्यकता है ताकि वे देश को हर परिस्थिति से निपटने में मदद कर सकें।

सिंह उत्तराखंड के घोराखाल स्थित सैनिक विद्यालय के हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि अधिक से अधिक युवा राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक मूल्यों को आत्मसात करें। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत देश भर में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने के निर्णय का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि एक अन्य पहल में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है।

भाषा दीप्ति

राजकुमार माधव

माधव


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