शस्त्रों का खुलेआम प्रदर्शन सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
शस्त्रों का खुलेआम प्रदर्शन सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज (उप्र), 22 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शस्त्रों के खुलेआम प्रदर्शन को सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण सिंह समेत 19 व्यक्तियों के शस्त्रों का ब्यौरा मांगा है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, “आत्मरक्षा के नाम पर ये हथियार, वास्तविक सुरक्षा से कहीं अधिक धमकी के उपकरण बन जाते हैं जो भय पैदा करते हैं। जिस समाज में सशस्त्र व्यक्ति प्रत्यक्ष बल प्रयोग और धमकियों के माध्यम से अपना वर्चस्व स्थापित करते हैं, वह समाज अधिक स्वतंत्र या शांतिपूर्ण नहीं बनता, बल्कि इससे जनता का विश्वास कम होता है।”
उच्च न्यायालय ने कहा, “इस अदालत का प्रथम दृष्टया विचार है कि हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन अक्सर सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ता है और आम लोगों में भय एवं असुरक्षा की भावना पैदा करता है। यद्यपि खुले में हथियार ले जाना कभी-कभी न्यायोचित हो सकता है, लेकिन आत्मरक्षा के नाम पर ये हथियार धमकाने का उपकरण बन जाते हैं।”
उच्च न्यायालय ने जिन व्यक्तियों का विवरण मांगा है उनमें रघुराज प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजित सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील सिंह, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सन्नी सिंह, छुन्नू सिंह और डाक्टर उदय भान सिंह शामिल हैं।
विवरण मांगने से पूर्व उच्च न्यायालय ने कहा, “बहस के दौरान ऐसा महसूस किया गया कि इस अदालत के समक्ष इसी तरह के मामले लंबित हैं जिनमें सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में शामिल व्यक्तियों से जुड़े लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। एक तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए और जानकारी आवश्यक है।”
उच्च न्यायालय ने इस मामले को 26 मई, 2026 को नए सिरे से सुनने के लिए सूचीबद्ध किया और निबंधक (अनुपालन) को इस आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव (गृह) और सभी 75 जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भेजने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले उत्तर प्रदेश में बढ़ती बंदूक संस्कृति पर सख्त रुख अपनाते हुए जारी शस्त्र लाइसेंसों के समग्र आंकड़े मांगे थे। अदालत ने कहा था कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले या संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति अपनी ताकत का प्रदर्शन करने, प्रभावशाली छवि बनाने और अप्रत्यक्ष रूप से दूसरों को डराने के लिए लाइसेंसी हथियारों का उपयोग कर रहे हैं जिससे भय का माहौल पैदा हो रहा है।
भाषा सं राजेंद्र राजकुमार
राजकुमार

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