विपक्ष यह विमर्श तैयार कर रहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद पैदा हुई: बांसुरी

विपक्ष यह विमर्श तैयार कर रहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद पैदा हुई: बांसुरी

विपक्ष यह विमर्श तैयार कर रहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद पैदा हुई: बांसुरी
Modified Date: July 28, 2026 / 03:44 pm IST
Published Date: July 28, 2026 3:44 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस तथा विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला और कहा कि वे यह विमर्श तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद पैदा हुई।

उन्होंने सदन में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इस संशोधन विधेयक को लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संवदेनशीलता और उनके जिम्मेदाराना सरकार का प्रमाण है।

नई दिल्ली से लोकसभा सदस्य स्वराज ने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि जब किसी प्रतियोगी परीक्षा में अनियिमता होती है तो उसका असर केवल अभ्यर्थी पर ही नहीं होता, बल्कि उसके माता-पिता पर भी पड़ता है।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि पेपर लीक एक ‘घोर अपराध’ है। इसलिए, इस सदन को आश्वासन देना चाहुंगी कि मोदी जी के लिए पेपर लीक को घोर पाप कहना केवल एक बयान नहीं, उनकी सरकार की नीयत है। इसलिए यह संशोधन (विधेयक) लाया गया है।’’

भाजपा सांसद ने कहा कि वर्तमान में परीक्षा माफिया संगठित हो गया है अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क बन गया है, ऐसे में यह विधेयक क्षेत्राधिकार की उलझन को सुलझाता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथी और विपक्ष के लोग यह विमर्श तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या केवल 2014 के बाद पैदा हुई है।

स्वराज ने कहा, ‘‘मीडिया की रिपोर्ट को सच माने तो विपक्षी दल शासित राज्यों और 2014 से पहले कांग्रेस नीत संपग्र (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार के दौरान 22 बार पेपर लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।’’

उन्होंने कहा कि विधेयक यह प्रावधान करता है कि केंद्र एक विशेष एसआईटी का गठन कर सकती है और जांच एजेंसी को मात्र दो माह के अंदर पूरी प्रक्रिया समाप्त करनी है तथा त्वरित अदालत को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना है।

उन्होंने उल्लेख किया कि विशेष सरकारी वकील नियुक्त किये जाएंगे जो केवल इस प्रकार के मुकदमे की पैरवी करेंगे और अपील सीधे उच्च न्यायालय की खंडपीठ में की जाएगी तथा उस अपील पर तीन महीने के अंदर फैसला सुनाया जाएगा।

स्वराज ने कहा, ‘‘न्याय में देरी, न्याय नहीं मिलना है। यही इस संशोधन की आत्मा है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि देश का बच्चा ‘एग्जाम वरियर’ से ‘एग्जाम वॉरियर’ बन जाए।

भाजपा सांसद ने उल्लेख किया कि 12 साल में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और मेडिकल सीट दोगुनी हो गई। आआईटी 16 से बढ़कर 23 हो गई हैं। एम्स सात से बढ़कर 20 हो गई है।

भाषा सुभाष हक

हक


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