राज्यसभा में विपक्ष ने उभयलिंगी व्यक्ति संबंधी संशोधन विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की

राज्यसभा में विपक्ष ने उभयलिंगी व्यक्ति संबंधी संशोधन विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की

राज्यसभा में विपक्ष ने उभयलिंगी व्यक्ति संबंधी संशोधन विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की
Modified Date: March 25, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: March 25, 2026 5:53 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों ने उभयलिंगी लोगों के बारे में सरकार द्वारा लाये गये एक विधेयक को समुदाय के साथ अन्याय करार देते हुए इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग की ताकि संबंधित विषय पर विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक चर्चा हो सके।

वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर घडियाली आंसू बहाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे जब सत्ता में थे तो उन्होंने इस समुदाय के हित में कोई कदम नहीं उठाया।

तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह सोशल मीडिया के हिसाब से चलती है और अमेरिका के दबाव में है। उन्होंने कहा कि सरकार उसी के अनुरूप कानून बनाती रहती है।

उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के मात्र 32,000 लोग ही रजिस्टर्ड हैं। उन्होंने कहा कि यह समुदाय वोट बैंक नहीं है, इसलिए उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है और इस पर व्यापक चर्चा करने की जरूरत है, इसलिए इसे प्रवर समिति में भेजने की जरूरत है।

आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने भी विधेयक का विरोध किया और प्रवर समिति में भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के लिए यह विधेयक लाया गया है, पहले उनसे बात की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किन्नर समुदाय के लोगों को शुभ मौकों पर बुलाया जाता है लेकिन यह सरकार उन्हें धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किन्नर समुदाय के हितों के लिए पैसे आवंटित किए लेकिन उन्हें खर्च नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार नौजवानों और किसानों के बाद अब किन्नर समुदाय के लोगों को धोखा दे रही है।

वाईएसआर कांग्रेस के गोला बाबूराव और आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने भी विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की।

बीजू जनता दल के शुभाशीष खुंटिया ने कहा कि यह संवेदनशील विषय है और इस समुदाय के लोग सामाजिक उपेक्षा का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि देश में सबके लिए समान अधिकार और समान अवसर होना चाहिए। उन्होंने भी विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की।

बीआरएस के रविचंद्र वद्दीराजू ने भी पहचान संबंधी प्रक्रिया पर आपत्ति जतायी। वहीं माकपा के जॉन ब्रिटास ने विधेयक को प्रतिगामी बताते हुए इसे व्यापक चर्चा के लिए प्रवर समिति में भेजने की मांग की।

सपा की जया बच्चन ने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस अभी लाने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि यह बजट सत्र है और इसमें वित्त संबंधी मामला पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने विधेयक को जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) में भेजने की मांग की।

सपा सदस्य ने कहा कि यह समुदाय सामाजिक रूप से अल्पसंख्यक है और उसके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समुदाय को भगवान राम का भी आशीर्वाद प्राप्त था और शुभ अवसर पर उन्हें बुलाया जाता है। उन्होंने कहा कि पुराने जमाने में राजा-महाराजाओं के यहां रक्षा के लिए ऐसे समुदाय के लोगों को रखा जाता था।

उन्होंने सरकार से कहा कि वह इस समुदाय की बददुआ नहीं नहीं ले।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि इस समुदाय के प्रति लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एकांकी दृष्टिकोण से बनाया गया है और व्यापक चर्चा के लिए इसे प्रवर समिति में भेजा जानी चाहिए।

भाषा अविनाश माधव

माधव


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