नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति को तड़ीपार करने का आदेश नागरिक को मिली अहम बुनियादी स्वतंत्रता पर सीधे असर डालता है और इसे सामान्य प्रक्रिया के तौर पर नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने पिछले साल नवंबर में एक व्यक्ति के खिलाफ जारी किए गए तड़ीपार आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश में संबंधित व्यक्ति को एक साल के लिए रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के उससे सटे जिलों की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया गया था।
पीठ ने कहा कि क्षेत्र से तड़ीपार करने के आदेश के समर्थन में कोई ठोस कारण न होने के कारण इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।
इसने कहा, ‘‘इसके अलावा, सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, इसे तड़ीपार करने का आदेश देने का आधार नहीं माना जा सकता।’’
पीठ ने कहा कि ऐसी शक्ति का इस्तेमाल करने से पहले, जिलाधिकारी को ईमानदारी से और पूरी जानकारी के साथ यह तय करना होगा कि मामले के हालात ऐसे कड़े कदम की मांग करते हैं और संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए तड़ीपार करना जरूरी है।
इसने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को तड़ीपार करने का आदेश सीधे तौर पर नागरिक को मिली अहम बुनियादी आज़ादी पर असर डालता है; इसलिए, ऐसा आदेश सामान्य प्रक्रिया के तौर पर या सिर्फ किसी के कहने भर से नहीं दिया जा सकता।’’
शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर अपना फैसला सुनाया।
उच्च न्यायालय ने तड़ीपार करने के आदेश के खिलाफ संबंधित व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी।
भाषा
नेत्रपाल माधव
माधव