दिल्ली के 194 थानों में से केवल 50 में ही ’पैरा लीगल’ स्वयंसेवक, 2025 में एक पोक्सो पीड़ित ने ली मदद
दिल्ली के 194 थानों में से केवल 50 में ही ’पैरा लीगल’ स्वयंसेवक, 2025 में एक पोक्सो पीड़ित ने ली मदद
(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) दिल्ली के 194 थानों में से केवल 50 में ही वर्तमान में पैरा-लीगल स्वयंसेवक हैं और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद, 2025 में पोक्सो मामले के सिर्फ एक पीड़ित ने ही उनकी सहायता का लाभ उठाया। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत दायर आवेदन के जवाब में यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
दिल्ली राज्य विधि सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के कुल थानों में से लगभग एक चौथाई यानी 50 थानों में पैरालीगल स्वयंसेवक (पीएलवी) आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में काम करते हैं।
हालांकि, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) कानून के मामलों में उनका उपयोग नगण्य प्रतीत होता है। जिला कानूनी सेवा अधिकारियों से प्राप्त जवाबों के अनुसार, 2025 में पोक्सो के केवल एक मामले में पीड़ित की सहायता के लिए एक पीएलवी को नियुक्त किया गया था और यह भी दक्षिण-पश्चिम जिले में।
आरटीआई आवेदन के जवाबों से यह भी पता चलता है कि स्वयंसेवकों को विशेष रूप से पोक्सो मामलों के लिए तैनात नहीं किया जाता है और वे मुख्य रूप से ‘लापता बच्चों’ से संबंधित परियोजना के तहत कार्यरत हैं।
आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर पूर्वी जिले में 10 थानों में से चार थानों – गोकलपुरी, खजूरी खास, न्यू उस्मानपुर और करावल नगर – में पीएलवी स्वयंसेवक तैनात हैं। नयी दिल्ली जिले में, केवल दो थानों– सागरपुर और वसंत कुंज साउथ में ही ऐसे स्वयंसेवक हैं।
दक्षिण जिले में, 14 थानों में से पांच थानों – संगम विहार, फतेहपुर बेरी, नेब सराय, आंबेडकर नगर और महरौली – में पीएलवी की तैनाती है। शाहदरा जिले में सीमापुरी, नंद नगरी, हर्ष विहार और जाफराबाद थानों में पीएलवी सेवाएं उपलब्ध हैं।
उत्तरी जिले के 15 थाने में से अलीपुर, जहांगीरपुरी, बवाना, भलस्वा डेयरी, समयपुर बादली, नरेला, शाहबाद डेयरी और स्वरूप नगर थानों में पीएलवी तैनात हैं।
दक्षिण-पश्चिम जिले में, 16 थानों में से छह थानों – बिंदापुर, डाबड़ी, उत्तम नगर, नजफगढ़, कापसहेड़ा और पालम में पीएलवी तैनात हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम जिले के 19 थानों में से सात थानों में पीएलवी तैनात हैं।
डीएसएलएसए ने कहा कि 2025 में पांच प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें 661 पीएलवी को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षित किया गया, जिनमें पोक्सो से संबंधित कानून भी शामिल हैं।
यह मुद्दा पिछले साल उच्चतम न्यायालय की जांच के दायरे में आया था, जिसने थानों में पीएलवी की तैनाती में कमी और पोक्सो अधिनियम की धारा 39 के तहत अनिवार्य सहायक व्यक्तियों की कमी पर चिंता व्यक्त की थी।
बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीएलवी तैनाती से संबंधित आंकड़ों को सत्यापित करने और जहां स्वयंसेवकों को सूचीबद्ध नहीं किया गया है या योजना के लिए धन आवंटित नहीं किया गया है, वहां सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया था।
भाषा
नोमान मनीषा
मनीषा

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