बिहार में कानूनी स्वयंसेवकों ने तीन हजार से अधिक दावे दायर किए, राजनीतिक दल नहीं कर रहे मदद: आयोग

बिहार में कानूनी स्वयंसेवकों ने तीन हजार से अधिक दावे दायर किए, राजनीतिक दल नहीं कर रहे मदद: आयोग

बिहार में कानूनी स्वयंसेवकों ने तीन हजार से अधिक दावे दायर किए, राजनीतिक दल नहीं कर रहे मदद: आयोग
Modified Date: September 15, 2025 / 08:53 pm IST
Published Date: September 15, 2025 8:53 pm IST

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि राजनीतिक दल और गैर सरकारी संगठन बिहार में एसआईआर प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने में मतदाताओं की सहायता नहीं कर रहे हैं, जबकि कानूनी स्वयंसेवकों ने पिछले एक पखवाड़े में 3,000 से अधिक ऑनलाइन दावे दाखिल किए हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आंकड़ों पर आश्चर्य व्यक्त किया और रेखांकित किया कि एक सितंबर से कानूनी स्वयंसेवकों ने 3,311 दावे/आपत्तियां/सुधार दायर किए हैं और इन शिकायतों में से 1027 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

कानूनी स्वयंसेवकों से राजनीतिक दलों और मतदाताओं की सहायता करने के लिए कहा गया था।

निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा, ‘‘यह सच है। उन्होंने 3000 से अधिक दावे दायर किए हैं, जिन पर कार्रवाई की जा रही है। कोई भी राजनीतिक दल या गैर सरकारी संगठन व्यक्तिगत मतदाताओं की सहायता के लिए आगे नहीं आया है।’’

गत एक सितंबर को, शीर्ष अदालत ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भ्रम को ‘‘बड़े पैमाने पर विश्वास का मुद्दा’’ बताया और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह एक अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने में व्यक्तिगत मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों की सहायता के लिए स्वयंसेवकों को तैनात करे।

पीठ ने कहा कि कानूनी स्वयंसेवक संबंधित जिला न्यायाधीशों के समक्ष एक गोपनीय रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और राज्य के एकत्रित आंकड़ों पर आठ सितंबर को विचार किया जाएगा।

बिहार में 2003 के बाद पहली बार हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण से एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

एसआईआर के दौरान, बिहार में मसौदा सूची में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ रह गई।

मसौदा सूची में पहले से पंजीकृत लगभग 65 लाख मतदाताओं को शामिल न करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा बताए गए कारणों में मृत्यु (22.34 लाख), ‘‘स्थायी रूप से स्थानांतरित/अनुपस्थित’’ (36.28 लाख) और ‘‘पहले से ही नामांकित (एक से अधिक स्थानों पर)’’ (7.01 लाख) शामिल हैं।

भाषा नेत्रपाल अविनाश

अविनाश


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