‘मालिक सुरक्षा उपाय करने में विफल रहे’ : दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन हादसा मामले में अदालत से कहा :

‘मालिक सुरक्षा उपाय करने में विफल रहे’ : दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन हादसा मामले में अदालत से कहा :

‘मालिक सुरक्षा उपाय करने में विफल रहे’ : दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन हादसा मामले में अदालत से कहा :
Modified Date: September 24, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: September 24, 2026 9:13 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि सत्य निकेतन इमारत मामले में मालिकों समेत छह आरोपियों ने निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे ऐसी स्थिति बनी और लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

दिल्ली पुलिस ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया कि इमारत अत्यधिक संरचनात्मक भार या मौजूदा ढांचे के कमजोर होने के कारण ढह गयी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘साउथ कैंपस’ के पास स्थित सत्य निकेतन में एक इमारत छह सितंबर को मरम्मत के दौरान ढह गई थी।

इस इमारत में लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास था। इस हादसे में मरने वाले सात लोगों में पांच छात्र थे, जबकि कई अन्य विद्यार्थी घायल हुए थे।

कानून के छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के सिलसिले में यह स्थिति रिपोर्ट दाखिल की गई है।

याचिका में प्रभावित छात्रों को तत्काल चिकित्सा सहायता एवं पुनर्वास, मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा इमारत ढहने से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया था।

मामले की सुनवाई शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।

पुलिस ने 21 सितंबर को दाखिल आठ पृष्ठों की स्थिति रिपोर्ट में बताया कि घटना के बाद आरोपी जिम्मेदारी लेने और हादसे के तुरंत बाद की स्थिति में मदद करने के बजाय मौके से भाग निकले।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मालिकों के आचरण और भूमिका पर गौर किया जा रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया, ‘‘प्रथम दृष्टया, गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों ने इमारत में और उसके आसपास निर्माण/मरम्मत/बदलाव कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे ऐसी स्थिति बनी और मानव जीवन खतरे में पड़ा तथा पीजी में रह रहे विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों की मौत हुई।’’

पुलिस ने बताया कि संपत्ति की मालिक आरोपी उर्मिला गुप्ता थीं और इसका संयुक्त रूप से प्रबंधन वह, उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता करते थे। ये दोनों भी मामले में आरोपी हैं।

पुलिस ने रिपोर्ट में बताया कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि उक्त लोगों ने भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति नहीं ली थी।

रिपोर्ट में बताया गया कि सक्षम अधिकारियों से जरूरी मंजूरी लिए बिना परिसर को किराये पर दिया जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘मालिकों ने बेसमेंट की मरम्मत और भूतल की दुकानों तथा इमारत के अन्य हिस्सों में किए गए निर्माण/संरचनात्मक बदलाव के संबंध में किसी योग्य इंजीनियर/वास्तुकार की सलाह नहीं ली थी, न ही उन्हें नियुक्त किया था।’’

पुलिस ने घटना के बाद आपराधिक मामला दर्ज किया और गुप्ता दंपति समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने शुभम त्यागी और सुधांशु कुमार को भी गिरफ्तार किया, जो इमारत में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से लड़कों के लिए पीजी आवास चला रहे थे।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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