Pahalgam Attack Anniversary | Photo Credit: IBC24
नई दिल्ली: Pahalgam Attack Anniversary आज से एक साल पहले 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (Pahalgam Attack) में एक आतंकी हमला हुआ था। जिसे कल पूरा एक साल हो जाएगा। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। जिनके अपने आंतकियों के गोलियों के शिकार बने, वह आज भी भयावह मंजर को नहीं भूल पाए। पहली बरसी पर हमले में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
Pahalgam Attack Anniversary पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले कौस्तुभ गणबोटे की पत्नी संगीता गणबोटे ने कहा कि जो हमला हुआ था वह बहुत खतरनाक था। मैं उसको मरते दम तक नहीं भूल पाऊंगी। पति की मौत के बाद मैं हमेशा दुख में ही डूबी रहती हूं। उन्होंने कहा कि उनकी यादों को मैं भुला नहीं पा रही हूं। क्योंकि सुबह से लेकर शाम तक मैं उनसे पूछकर ही खाना बनाती थी। पहलगाम हमले की जवाब में भारतीय सेना की ओर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की कार्रवाई की गई। इस पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव किया है उससे थोड़ा दुख तो हल्का हुआ है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि उससे कुछ फर्क पड़ेगा। न्होंने कहा कि आतंकियों ने मेरे पति को मारा उसके जवाब में हम उनको मार रहे हैं। इससे थोड़ी कुछ हल्का हो सकता है। इससे मेरे पति थोड़ी वापस आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि अगर आपका झगड़ा सरकार के साथ है तो सरकार से बात करो।
बेंगलुरु की डॉ. सुजाता हॉस्पिटल में लंबे समय तक व्यस्त रहती हैं क्योंकि उनकी आंखों से बैसरन घाटी में पति भारत भूषण की आतंकी हमले में मौत का मंजर नहीं जा रहा है। डॉ. सुजाता कहती हैं कि उन्होंने अपनी भावनाएं और मुस्कान खो दी हैं। उनके उनके साढ़े चार साल के बेटे ने उस हमले को अपनी आंखों से देखा था। वह बार-बार कह रहा था कि पापा को चोट लगी है, बहुत सारा खून बह रहा है। डॉ. सुजाता के क्लिनिक में उनके पास ही भरत भूषण की तस्वीर रखी है। वह रविवार का दिन वह अपने बेटे के लिए ही रखती हैं। सुजाता बताती हैं कि अब उनके बेटे को भी एहसास हो गया है कि पिता दुनिया में नहीं हैं। वह अपने पिता की तरह बहुत शांत स्वभाव का है। जब वग उसके आस-पास नहीं होती, तो वह जिद नहीं करता। आज भी सुजाता के जेहन में हमले का डर बना रहता है।
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में कर्नाटक के शिवमोग्गा में रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी मंजूनाथ राव मारे गए थे। इस हमले के एक साल बाद भी मंजूनाथ राव का परिवार गम से उबरने की कोशिश कर रहा है। गोलीबारी में बची उनकी पत्नी पल्लवी और 18 साल का बेटा अभिजेय बैसरन घाटी का वह मंजर नहीं भूल पा रहे हैं। मंजूनाथ की 70 साल की मां सुमति आज भी याद करती हैं कि उन्होंने बेटे को कश्मीर नहीं जाने की सलाह दी थी। पल्लवी ने भी इस टूर का विरोध किया था, मगर दोस्तों की जिद मानकर उन्होंने कश्मीर यात्रा की प्लानिंग कर ली थी। बेटे की मौत के बाद सुमति पूरी तरह से भक्ति भजन में लीन रहती हैं। मंजूनाथ के पिता की मौत पांच साल पहले हो गई थी। वह अपने परिवार के लिए कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। परिवार ने हाल में ही हिंदू कैलेंडर के हिसाब से उनकी बरसी मनाई है।