कोलकाता में पारा-शिक्षकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर रैली निकाली; पुलिस ने रोका
कोलकाता में पारा-शिक्षकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर रैली निकाली; पुलिस ने रोका
कोलकाता, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल में सैकड़ों पारा-शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को कॉलेज स्क्वायर पर धरना प्रदर्शन किया। पुलिस ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास की ओर जा रही रैली को रोक दिया।
राज्य में पारा-शिक्षकों के एक मंच ‘परशा शिक्षक ओइक्यो मंच’ के लगभग 500 सदस्य, जिन्होंने सियालदह स्टेशन से अपना मार्च शुरू किया था और कालीघाट क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्ते में सुबोध मल्लिक स्क्वायर की ओर बढ़ रहे थे, उन्हें कॉलेज स्क्वायर पर पुलिस ने रोक दिया और आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
मंच के संयोजक भागीरथ घोष ने कहा, ‘हमें मुख्यमंत्री के आवास जाते समय रोक दिया गया क्योंकि हम उन्हें ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हम पूरी तरह से लाचार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिक स्तर पर पारा-शिक्षकों को 10,000 रुपये प्रति माह और उच्च प्राथमिक स्तर पर 13,000 रुपये प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है। हमारी मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 20,000-25,000 रुपये किया जाए।’
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि मंच के पास कालीघाट या हाजरा तक रैली निकालने की पूर्व अनुमति नहीं थी और उसने कोई ज्ञापन सौंपने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क नहीं किया था।
घोष ने कहा कि राज्य-सहायता प्राप्त स्कूलों में पारा-शिक्षकों पर प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों का भारी बोझ होता है, लेकिन नियमित शिक्षकों की तुलना में उनका वेतन अनुपात घोर अन्यायपूर्ण है।
धरने के दौरान, गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण तनाव से एक महिला प्रदर्शनकारी बेहोश हो गई और प्रारंभिक उपचार के बाद उसे पास के अस्पताल ले जाया गया।
यह मंच पिछले एक सप्ताह से राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय, बिकाश भवन के सामने इन्हीं मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन जारी रखे हुए है।
घोष ने यह भी मांग की कि पारा-शिक्षकों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में शामिल किया जाए क्योंकि उन्हें कोई ग्रेच्युटी लाभ नहीं मिलता है और वे किसी भी पेंशन योजना में शामिल नहीं हैं।
पश्चिम बंगाल में हजारों पारा-शिक्षक, जो स्कूलों में संविदा या अंशकालिक आधार पर कार्यरत शिक्षक हैं, बेहतर वेतन और नौकरी की सुरक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
भाषा तान्या रंजन
रंजन

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