संसदीय समिति ने अगली पीढ़ी के पंचायत सुधारों की सिफारिश की

संसदीय समिति ने अगली पीढ़ी के पंचायत सुधारों की सिफारिश की

संसदीय समिति ने अगली पीढ़ी के पंचायत सुधारों की सिफारिश की
Modified Date: August 5, 2026 / 07:28 pm IST
Published Date: August 5, 2026 7:28 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने सरकार से पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज की व्यापक समीक्षा कर लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, वित्तीय आत्मनिर्भरता और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए ‘‘पंचायत सुधारों की अगली पीढ़ी’’ की रूपरेख तैयार करने की सिफारिश की है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी विभागीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन दशक में पंचायती राज संस्थाएं लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी हैं, लेकिन अब भी कई संरचनात्मक चुनौतियां हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति का मानना है कि तीन दशक से अधिक के अनुभव के बाद अब केवल (पंचायती राज) संस्थाओं के गठन तक सीमित रहने के बजाय उनकी प्रभावशीलता, जवाबदेही और सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने की क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान देने का समय आ गया है।’’

समिति ने सिफारिश की कि पंचायती राज मंत्रालय राज्यों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श कर पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज की व्यापक समीक्षा करे और ‘‘पंचायत सुधारों की अगली पीढ़ी’’ के लिए एक रूपरेखा तैयार करे।

समिति ने कहा कि इस रूपरेखा का उद्देश्य लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को और बढ़ाना, संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना, वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाना, डिजिटल प्रशासन को प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए।

समिति ने मंत्रालय से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पंचायत समितियों और जिला परिषदों को सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका और अधिकार बढ़ाने के उपायों पर विचार करने की सिफारिश की।

समिति ने यह भी चिंता जताई कि कई क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की बैठकें अपना प्रभाव खोती जा रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘कई क्षेत्रों में ग्राम सभा की बैठकें महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं और इनमें लोगों की भागीदारी में काफी कमी आई है।’’

इसमें चेतावनी दी गई है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कमजोर होगा। समिति का मानना है कि ग्राम सभाओं के कमजोर पड़ने से संविधान में परिकल्पित लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की भावना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

समिति ने कहा कि महात्मा गांधी के ‘‘ग्राम स्वराज’’ के सपने को साकार करने के लिए ग्राम सभाओं को फिर से सशक्त और सक्रिय बनाना बेहद जरूरी है।

वित्तीय स्थिति पर समिति ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोगों से अनुदान बढ़ने के बावजूद पंचायतें अब भी मुख्य रूप से इन्हीं अनुदानों पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘समिति का मानना है कि बाहरी अनुदानों पर अत्यधिक निर्भरता पंचायती राज संस्थाओं की स्वायत्तता, स्थिरता और प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।’’

भाषा

हक हक सुभाष

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