नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देने और उन्हें पद से हटाने को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी है।
अधिवक्ता योगमाया एमजी की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि मिश्रा पहली बार 2012 में बीसीआई अध्यक्ष चुने गए थे। हालांकि, उन्होंने 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया था, लेकिन वह उसी वर्ष नवंबर में दोबारा अध्यक्ष बन गए और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।
याचिका में दलील दी गयी है कि बीसीआई का नियम 12(2) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए दो साल का कार्यकाल या सदस्यता समाप्त होने तक की अवधि (दोनों में से जो भी पहले हो) निर्धारित करता है।
याचिका में उच्चतम न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार, इस समिति की सहायता के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा एक ऑडिटर और वित्तीय एवं तकनीकी विशेषज्ञ भी नामित किये जा सकते हैं।
याचिका में 21 अप्रैल, 2025 की उस राजपत्रित अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मिश्रा का कार्यकाल 2030 तक बढ़ा दिया गया है। यह भी दलील दी गयी है कि कोई प्रशासनिक अधिसूचना बीसीआई को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे से ऊपर नहीं हो सकती।
भाषा सुरेश दिलीप
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