पदक विजेतों की सूची में शामिल होने की खुशी है लेकिन यह तो बस शुरुआत है : त्रीसा-गायत्री

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पदक विजेतों की सूची में शामिल होने की खुशी है लेकिन यह तो बस शुरुआत है : त्रीसा-गायत्री

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 09:14 PM IST

… अमित कुमार दास …

नयी दिल्ली, (22 अगस्त (भाषा) विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने से चूकीं गायत्री गोपीचंद और त्रीसा जॉली ने शानदार प्रदर्शन के दम पर महिला युगल में भारत को ऐतिहासिक पदक दिलाते हुए अपनी क्षमता पर नया भरोसा जगाया। गायत्री और त्रीसा का प्रेरणादायी अभियान महिला युगल के सेमीफाइनल में विश्व नंबर एक और गत चैंपियन लियू शेंग शू और तान निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 की हार के साथ समाप्त हुआ। भारत ने महिला युगल में इससे पहले 2011 में विश्व चैंपियनशिप पदक जीता था, जब लंदन में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने कांस्य पदक हासिल किया था। इस पदक के साथ गायत्री और त्रीसा उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप के पोडियम पर जगह बनाई है। मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत में त्रीसा ने कहा, ‘‘इस क्लब का हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं। हमारे सामने अभी लंबा सफर है। मुझे लगता है कि यह तो बस शुरुआत है।’’ उन्होंने अपनी टीम के सदस्यों को श्रेय देते हुए कहा, “सबसे पहले मैं अपनी टीम के उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहूंगी, जो हमारे पीछे खड़े रहे। हम उन्हें लंच या कुछ और खिलाएंगे।” त्रीसा ने कहा कि इस उपलब्धि की खुशी इसलिए भी खास है क्योंकि इसी सप्ताह उन्हें और गायत्री को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसे सकारात्मक और आत्मविश्वास के साथ लेना होगा। इसी सप्ताह जब अर्जुन पुरस्कार की घोषणा हुई, तो मुझे लगता है कि उससे भी इस टूर्नामेंट में हमें अतिरिक्त हौसला मिला।’’ सेमीफाइनल में हार के बावजूद त्रीसा अपने पूरे अभियान से बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप पूरे सप्ताह को देखें तो यह शानदार रहा है। हमने कई बड़े उलटफेर किए और यह हमारे लिए बहुत अच्छा सप्ताह रहा। हमने कई शानदार मुकाबले खेले और इस टूर्नामेंट से सीखने और अपने साथ ले जाने के लिए बहुत कुछ मिला।” गायत्री ने बताया कि पिछले मुकाबले की भावनात्मक और मानसिक थकान का असर सेमीफाइनल में महसूस हुआ। उन्होंने कहा, “कल का मुकाबला काफी कठिन और भावनात्मक था। इसलिए मानसिक रूप से वह काफी चुनौतीपूर्ण रहा। आज जब हम कोर्ट पर उतरे तो पहले गेम में हम तरोताजा थे। लेकिन कभी-कभी मानसिक रूप से थोड़ी थकान हो ही जाती है।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि निर्णायक परिस्थितियों में आत्मविश्वास और किस्मत दोनों का साथ आना जरूरी होता है।’’ भाषा आनन्द नमितानमिता