प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ‘देशद्रोही’, जांच का सामना करना पड़ेगा: राहुल

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ‘देशद्रोही’, जांच का सामना करना पड़ेगा: राहुल

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ‘देशद्रोही’, जांच का सामना करना पड़ेगा: राहुल
Modified Date: September 24, 2026 / 07:40 pm IST
Published Date: September 24, 2026 7:40 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबरों के बीच बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि ‘‘लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली को नष्ट करने वाले’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘देशद्रोही’ हैं तथा आने वाले समय में शाह तथा मोदी को इसके लिए जांच का सामना करना पड़ेगा।

गांधी ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और ‘सरकारी गवाह’ बनना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना ‘‘राष्ट्रवाद का कार्य’’ होगा।

उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली और लोगों के वोट के साथ जो किया गया है, वह राष्ट्र विरोधी कृत्य है और कांग्रेस तथा दूसरे विपक्षी दल इसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे।

गांधी ने पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ‘‘वोट चोरी’’ को लेकर एक प्रस्तुति दी, जबकि उनके ठीक पीछे स्क्रीन पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, ज्ञानेश कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, उद्योगपति गौतम अदाणी तथा कुछ अन्य लोगों की तस्वीरें लगाई गई थीं तथा इन्हें लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का ‘‘साजिशकर्ता’’ बताया गया था।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘हम भारत में लोकतंत्र को नष्ट नहीं होने देंगे और चुप नहीं बैठेंगे। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।’’

कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- द्वारा आयोग के कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘‘समझदारी भरा काम’’ किया है।

गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने रुख पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ‘‘सरकारी गवाह’’ बन जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा करना राष्ट्रवाद का कार्य होगा।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘असल में ये लोग देशद्रोही हैं। जो (लोग) मताधिकार को निशाना बनाते हैं और भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बुनियादी रूप से नष्ट करते है, वह किसी भी तरह देशद्रोही से कम नहीं है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि इस देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है और उसे नष्ट कर दिया है।’’

उन्होंने दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव और पिछले कुछ वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों में धांधली की गयी थी।

गांधी ने कहा कि वोट देश की बुनियाद है और निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह लोगों के वोट की रक्षा करे।

उन्होंने कहा, ‘‘वोट से संविधान को शक्ति मिलती है, संविधान से हमारे कानून बनते हैं और कानूनों से हमारी संस्थाएं चलती हैं। यह एक शृंखला है। यही शृंखला आधुनिक भारत को परिभाषित करती है।’’

गांधी ने दावा किया कि मौजूदा विवाद केवल वोट पर हमला नहीं है, बल्कि ‘‘हर भारतीय के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति’’ पर हमला है।

उन्होंने देश की राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) का भी उल्लेख किया और कहा कि यह एक ऐसी ताकत है, जो किसी भी सरकार को नहीं बख्शती है।

कांग्रेस नेता का कहना है कि सद्दाम हुसैन के इराक और उत्तर कोरिया में सत्ता-विरोधी माहौल नहीं हो सकता, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा होता है।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध में जीत और भारी लोकप्रियता के बावजूद उनके खिलाफ कुछ समय बाद सत्ता-विरोधी लहर पैदा हुई थी।

गांधी ने कहा कि सत्ता-विरोधी भावना हर पार्टी के खिलाफ देखी गई है, चाहे वह क्षेत्रीय हो या राष्ट्रीय, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के मामले में ऐसा नहीं हुआ है, जो हैरानी की बात है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और किसी सरकार के प्रदर्शन को समझ सकते हैं, लेकिन हम यह नहीं समझ सकते कि सत्ता-विरोधी भावना गायब कैसे हो गई।’’

गांधी ने कहा कि ‘‘वोट चोरी’’ से ‘कानून’’ चोरी होता है और फिर ‘‘संस्था’’ चोरी होती है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी से सांसद बने नेताओं द्वारा बनाया गया कोई भी कानून अवैध होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले कुछ महीनों में सब कुछ साफ हो जाएगा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि वर्ष 2023 में एक विधेयक पारित कर निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों को किसी भी कानूनी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि दो निर्वाचन आयुक्तों के पत्रों के बाद भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि उनकी रक्षा करने वाला ऊपर बैठा है।

दरअसल, अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं।

दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके सभी फैसले स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।

भाषा हक हक सुरेश

सुरेश


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