प्रधानमंत्री मोदी ने अंगदान का नेक कार्य करने वालों की सराहना की
प्रधानमंत्री मोदी ने अंगदान का नेक कार्य करने वालों की सराहना की
नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अंगदान के नेक कार्य पर प्रकाश डाला और कहा कि इस तरह के नेक कदम के बारे में जागरूकता उन लोगों की मदद कर रही है, जिन्हें इसकी जरूरत है, साथ ही देश में चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूत कर रही है।
अपने मासिक रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ में मोदी ने केरल की 10 महीने की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम की मौत के बारे में बात की, जिसके माता-पिता ने उसके अंग दान करने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपने छोटे बच्चे को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता।
उन्होंने कहा, “कुछ ही दिन पहले हमने केरल की एक नन्ही मासूम बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम को खो दिया। महज 10 महीनों में वो इस दुनिया से चली गई। कल्पना कीजिए, उसके सामने पूरी जिंदगी थी, जो अचानक खत्म हो गई। कितने ही सपने और खुशियां अधूरी रह गईं। उसके माता-पिता जिस पीड़ा से गुजर रहे होंगे, उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है।”
लेकिन इतने गहरे दर्द के बीच भी आलिन के पिता अरुण अब्राहम और मां शेरिन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे हर देशवासी का हृदय उनके प्रति सम्मान से भर गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, उन्होंने आलिन के अंगदान का फैसला किया। इस एक फैसले से पता चलता है कि उनकी सोच कितनी बड़ी है और व्यक्तित्व कितना विशाल।
उन्होंने कहा, “एक तरफ वे अपनी बच्ची को खोने के शोक में डूबे थे, तो वहीं दूसरों की मदद का भाव भी उनमें भरा था। वे चाहते थे कि किसी भी परिवार को ऐसा दिन देखना ना पड़े। आलिन शेरिन अब्राहम आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका नाम देश के कम उम्र की अंग दानदाताओं में जुड़ गया है।”
उन्होंने कहा कि अंग दान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इससे उन लोगों की मदद हो रही है, जिन्हें इसकी जरूरत है। इसके साथ ही देश में चिकित्सा अनुसंधान को भी बल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कई संस्थाएं और लोग असाधारण कार्य कर रहे हैं।
मोदी ने कहा कि केरल की आलिन की तरह ही ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्होंने अंग दान के जरिए, किसी को दूसरा जीवन दिया है। जैसे दिल्ली की लक्ष्मी देवी, जिन्होंने हृदय प्रतिरोपण के बाद बीते वर्ष केदारनाथ की यात्रा की।
प्रधानमंत्री ने बताया कि देवी का हृदय केवल 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था। ऐसे में उन्हें एक अंगदान करने वाले का हृदय मिला, जिसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद तो उनका जीवन ही बदल गया।
उन्होंने कहा, “आपको इस तरह के बहुत से प्रेरक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। इससे ये बात फिर साबित होती है कि किसी एक की नेक पहल, न जाने कितने लोगों की जिंदगी बदल सकती है। मैं उन सभी लोगों की हृदय से सराहना करता हूं, जिन्होंने ऐसे नेक कार्य किए हैं।”
भाषा प्रशांत दिलीप
दिलीप

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