प्रधानमंत्री, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पार्वती गिरि को जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पार्वती गिरि को जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पार्वती गिरि को जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि दी
Modified Date: January 19, 2026 / 01:27 pm IST
Published Date: January 19, 2026 1:27 pm IST

भुवनेश्वर, 19 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य प्रमुख हस्तियों ने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक पार्वती गिरि को उनकी जन्म शताब्दी पर सोमवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की।

बरगढ़ जिले के समलाईपादर गांव में 19 जनवरी 1926 को जन्मी पार्वती गिरि, महात्मा गांधी से प्रभावित होकर 16 वर्ष की आयु में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गईं और उन्हें दो साल के लिए जेल में डाल दिया गया।

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मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के लिए आंदोलन में सराहनीय भूमिका निभाई। जनता की सेवा के प्रति उनका समर्पण तथा स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तीकरण और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान सराहनीय है। मैंने पिछले महीने के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी यही कहा था।’’

अपने संदेश में कंभमपति ने कहा कि समाज के गरीब और असहाय लोगों के कल्याण और महिला सशक्तीकरण में गिरि का योगदान प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बना रहेगा।

माझी ने गिरि को ‘ओडिशा की अग्नि पुत्री’ कहकर उनकी प्रशंसा की और उन्हें सेवा तथा बलिदान का एक अनूठा प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मैं स्वतंत्रता सेनानी पार्वती गिरि को नमन करता हूं। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक सेवा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। जनसेवा के प्रति उनका समर्पण और उनके आदर्श हमारे लिए सदा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।’’

पटनायक ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए गिरि का संघर्ष और बलिदान अद्वितीय था।

प्रधान ने कहा कि गिरि ओडिशा के गौरव, सेवा और बलिदान की साक्षात मूर्ति थीं।

भाषा यासिर वैभव

वैभव


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