ओएसएम मामले पर दखल दें और समाधान सुनिश्चित करें प्रधानमंत्री: वेणुगोपाल

ओएसएम मामले पर दखल दें और समाधान सुनिश्चित करें प्रधानमंत्री: वेणुगोपाल

ओएसएम मामले पर दखल दें और समाधान सुनिश्चित करें प्रधानमंत्री: वेणुगोपाल
Modified Date: May 26, 2026 / 08:41 pm IST
Published Date: May 26, 2026 8:41 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली से जुड़े मामले में दखल दें और समाधान सुनिश्चित करें।

उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दावा किया कि सीबीएसई की प्रशासनिक और प्रणालीगत विफलता के लिए छात्रों को आर्थिक, शैक्षणिक या मानसिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘मैं पूरे भारत और खाड़ी देशों में सीबीएसई कक्षा 10 और 12 के लाखों छात्रों की व्यापक चिंताओं पर आपका तत्काल ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली की शुरूआत के परिणामस्वरूप भयावह विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे अनगिनत छात्रों की उच्च शिक्षा की संभावनाएं और मानसिक कल्याण खतरे में पड़ गया है।’’

उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि इन महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को अपने उचित अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

वेणुगोपाल का कहना था, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि प्राथमिक चिंता नई कार्यान्वित डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया से जुड़ी है। यह प्रणाली अनियमित और गहरी त्रुटिपूर्ण साबित हुई है। छात्रों ने मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर विसंगतियों की बात की है। ऐसे उदाहरणों भी हैं जहां सही उत्तर लिखने वाले छात्रों को शून्य अंक दिए गए हैं।’’

उनका कहना है कि उत्तर पुस्तिका की प्रति के लिए आवेदन करने की समय सीमा सोमवार आधी रात को समाप्त हो गई तथा पुनर्मूल्यांकन आवेदन की अंतिम तिथि 29 मई है।

वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ऐसे में छात्र समुदाय के बीच चिंता बहुत बढ़ गई है। सीबीएसई की प्रशासनिक और प्रणालीगत विफलता के लिए छात्रों को आर्थिक, शैक्षणिक या मानसिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, मैं इस मामले में आपके तत्काल हस्तक्षेप और समयबद्ध तरीके से एक बार समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं ताकि कोई भी छात्र आगामी उच्च अध्ययन की समय सीमा से न चूक जाए।’’

भाषा हक

हक पवनेश

पवनेश


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