पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देकर जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देकर जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देकर जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
Modified Date: August 21, 2026 / 10:54 pm IST
Published Date: August 21, 2026 10:54 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच विरोध स्थल और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

सामने आए दृश्यों में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेते दिखाई दिए। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर मौके पर जमा हुए और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के जरिये इस विरोध प्रदर्शन के लिए लामबंद किया गया था। उनकी मांग थी कि सरकारी सहायता और आरक्षण की पात्रता तय करने में जाति के बजाय आर्थिक मानदंड को प्राथमिकता दी जाए।

पुलिस ने प्रदर्शन से पहले इलाके के प्रमुख स्थलों पर पुलिस कर्मियों और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया और जंतर-मंतर की ओर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अवरोधक लगा दिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध, जुलूस, प्रदर्शन या सभा के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

हालांकि, मध्य जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्रवार को एक अलग स्थल रामलीला मैदान पर ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया गया था।

एनओसी के तहत शाम चार बजे तक रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों को एकत्र होने की अनुमति दी गई थी। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन पर उसे ‘कोई आपत्ति नहीं’ थी।

इस विरोध अभियान का नेतृत्व ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ द्वारा किया गया था, जो इंस्टाग्राम पर एक पेज है। इसने लोगों से 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इंस्टाग्राम पर इस पेज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सरकारी सहायता किसे मिलनी चाहिए, यह तय करते समय आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाए।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हमारी मांग है कि सरकारी मदद को लेकर आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाए। जाति से परे, किसी भी गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सहायता प्रदान की जानी चाहिए।’

एक अन्य प्रतिभागी ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि इसके लाभ हमेशा सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुंचते हैं।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में क्रीमी-लेयर मानदंड लागू करने की भी मांग की और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के ढांचे सहित उच्च शिक्षा नीतियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए।

भाषा नोमान नोमान सुरेश

सुरेश


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