चंडीगढ़, एक जून (भाषा) पंजाब पुलिस ने एक पुलिस थाने में जबरन घुसकर एक व्यक्ति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश करने के आरोप में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए उनके आवासों पर सोमवार को छापेमारी की।
अमृतसर ग्रामीण पुलिस के अनुसार, सोमवार को पुलिस मजीठिया के अमृतसर स्थित ग्रीन एवेन्यू आवास पर गई, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं थे।
पुलिस ने आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता मजीठिया और 50-60 अन्य लोग रविवार को जबरन थाने में घुस गए, ‘‘कानून की पूरी तरह अवहेलना करते हुए’’ विभिन्न कमरों में गए और मामले से संबंधित दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने कहा कि ‘‘कोई व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी’’ और मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
हालांकि, शिअद ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति हाल में हुए नगर निकाय चुनाव में पार्टी का मतदान अभिकर्ता (पोलिंग एजेंट) था और उसे पुलिस लॉकअप के बजाय थाना प्रभारी (एसएचओ) के क्वार्टर में रखा गया था। शिअद ने मामले को ‘‘गढ़ा हुआ’’ और ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ से प्रेरित बताया।
अमृतसर में मजीठिया के आवास के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में अमृतसर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक आदित्य वारियर ने कहा कि रविवार को हुई घटना में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जब अमृतसर ग्रामीण पुलिस मजीठिया के आवास पहुंची तो वह वहां मौजूद नहीं थे। वारियर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि रविवार की घटना के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और ‘‘हम यहां मजीठिया को गिरफ्तार करने आए थे।’’
अमृतसर (ग्रामीण) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुहैल मीर कासिम ने बताया कि जोबनप्रीत सिंह को रविवार सुबह गिरफ्तार किया गया था।
कासिम ने कहा, ‘‘औपचारिक गिरफ्तारी के बाद जब वह वैध पुलिस हिरासत में था और उससे पूछताछ की जा रही थी, तभी एक अवैध जमावड़ा मजीठा थाने के बाहर एकत्र हो गया। उन्होंने हमारे कर्मचारियों पर काबू पाकर पूर्व नियोजित साजिश के तहत जबरन थाने में प्रवेश किया, जिसका उद्देश्य जोबनप्रीत को छुड़ाना था।’’
उन्होंने कहा कि भीड़ का प्रवेश अवैध और अनधिकृत था। एसएसपी ने आरोप लगाया, ‘‘बिक्रम सिंह मजीठिया भी इसमें शामिल थे और उन्होंने कानून की पूरी तरह अवहेलना करते हुए बिना किसी अधिकार के थाने के कमरों की तलाशी शुरू कर दी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे उस कमरे तक भी पहुंच गए, जहां जोबनप्रीत से पूछताछ की जा रही थी। हमारे कर्मचारियों ने इसका विरोध किया, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। वहां रखी केस फाइल को भी नुकसान पहुंचाया गया।’’
कासिम ने बताया कि इसके बाद जोबनप्रीत को उस कमरे से जबरन बाहर ले जाया गया, जबकि वह वैध पुलिस हिरासत में था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान एसएचओ और डीएसपी मजीठा स्थिति नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन गैर-कानूनी तरीके से जमा भीड़ उनसे भिड़ गयी। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताने का प्रयास किया कि जोबनप्रीत की औपचारिक गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बावजूद उसे पुलिस हिरासत से बाहर ले जाने की कोशिश की गई।’’
एसएसपी ने कहा, ‘‘पुलिस बल पर हमला किया गया और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया। एसएचओ का मोबाइल फोन छीनने का भी प्रयास किया गया।’’
एसएसपी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने हालांकि जोबनप्रीत को दोबारा अपनी हिरासत में ले लिया। उन्होंने बताया कि इसके बाद भीड़ ने नारेबाजी की, हंगामा करने की कोशिश की और भय का माहौल बनाने का प्रयास किया।
कासिम ने कहा, ‘‘उपलब्ध सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। हमारी छापेमारी जारी है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष जांच दल गठित किया गया है।
एसएसपी ने कहा, ‘कोई व्यक्ति कितना भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, यदि वह कानून तोड़ता है तो कानून अपना काम करेगा और कार्रवाई होगी।’’
यह पूछे जाने पर कि प्राथमिकी में कितने लोगों को नामजद किया गया है, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो के अनुसार 50-60 से अधिक लोग वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि छह से सात लोगों की पहचान कर ली गई है और बाकी की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मजीठिया भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे, एसएसपी ने कहा कि वह ‘‘अवैध जमावड़े’’ का हिस्सा थे।
इस बीच, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘वे हताश हैं। यह पंजाब सरकार की सुनियोजित साजिश है।’’
उन्होंने बताया कि हाल ही में आम आदमी पार्टी के नेता तलबीर गिल ने अपने कार्यकर्ता को पुलिस हिरासत से जबरन छुड़ाया था। बादल ने कहा, ‘‘हालांकि गिल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि बिक्रम मजीठिया को झूठे मामले में फंसाकर निशाना बनाया जा रहा है।’’
बठिंडा की सांसद और मजीठिया की बहन हरसिमरत कौर बादल ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारे अकाली कार्यकर्ताओं में से एक को घायल करने वाले को मजीठा प्रभारी द्वारा पुलिस थाने से बाहर ले जाया गया और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन जिसे बिना किसी प्राथमिकी के एसएचओ के घर में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था…जब उसे बचाया गया, तो (बिक्रम) मजीठिया के खिलाफ प्राथमकी दर्ज कर ली गई।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘पूरा पंजाब देख रहा है। यह मुख्यमंत्री हताश है। वह मजीठिया से क्यों डर रहे हैं? पुलिस का दुरुपयोग क्यों किया जा रहा है? बिक्रम ने क्या गलत किया?’’
शिअद ने जोबनप्रीत की गिरफ्तारी के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
शिअद प्रवक्ता अर्शदीप सिंह क्लेर ने कहा कि सात साल या उससे कम की सजा वाले अपराधों में किसी को भी गिरफ्तार करने से पहले पुलिस द्वारा नोटिस देना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि जोबनप्रीत को ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था और अब जाकर उनकी गिरफ्तारी के कारण बताए गए हैं। उच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले में दो जून के लिए नोटिस जारी किया।
क्लेर ने कहा, ‘‘अगर कोई अवैध हिरासत में है और लोगों ने उसे छुड़ा लिया है तो यह अपराध नहीं है। पूरी घटना वीडियो में रिकॉर्ड है।’’
उन्होंने कहा कि उन्होंने मजीठिया और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमकी की कोई प्रति जारी नहीं की है।
शिअद नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ता और चुनाव अभिकर्ता जोबनप्रीत सिंह को रविवार तड़के उसके घर से हिरासत में लिया गया और अमृतसर में पुलिस लॉकअप के बजाय स्थानीय एसएचओ के आवासीय परिसर में रखा गया।
बिक्रम सिंह मजीठिया और उनके समर्थकों का आरोप है कि हाल में हुए नगर निकाय चुनाव में शिअद के मतदान अभिकर्ता होने के कारण जोबनप्रीत को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत एक मनगढ़ंत मामले में फंसाकर हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि रविवार को मजीठिया और उनके समर्थकों ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस अधिकारियों से सवाल किया।
भाषा अमित सुरेश
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