पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले को सुलझाया; अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार

पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले को सुलझाया; अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार

पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले को सुलझाया; अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार
Modified Date: January 10, 2026 / 07:31 pm IST
Published Date: January 10, 2026 7:31 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने ताइवान से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने पूरे भारत में कथित तौर पर आतंकवाद विरोधी एवं कानून प्रवर्तन अधिकारियों का वेश धारण कर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और करीब 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक ताइवानी नागरिक भी शामिल है, जो कथित तौर पर इस पूरे अपराध का में समन्वय करने की भूमिका निभा रहा था।

उसने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)अधिनियम और दूरसंचार अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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जांचकर्ताओं ने बताया कि कई आरोपियों ने पहले कंबोडिया स्थित साइबर अपराध केंद्रों में काम किया था और कथित तौर पर उन्हें पाकिस्तान स्थित एक आका द्वारा भर्ती और वित्त पोषित किया गया था, जबकि नेपाल स्थित एक बिचौलिए पर दूर से संचालन को नियंत्रित करने का संदेह है।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करके पीड़ितों को फोन कॉल करते थे और उन पर पहलगाम हमले और दिल्ली विस्फोट जैसी आतंकी घटनाओं से जुड़े होने का झूठा आरोप लगाते थे।

पुलिस उपायुक्त (इंटेलिजेंस फ्यूजन और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) विनीत कुमार ने बताया, ‘‘पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो या ऑडियो निगरानी में रखा जाता था, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है। पीड़ितों को निर्दोषता ‘साबित’ करने के लिए पैसे अंतरण करने के लिए दबाव डाला जाता था।’’

पुलिस ने बताया कि ये कॉल विदेश से की गई थीं, लेकिन अवैध सिम बॉक्स इंस्टॉलेशन का उपयोग करके इन्हें घरेलू भारतीय नंबरों के रूप में दिखाया गया था, जिससे आरोपियों में कॉल वास्तविक होने का भ्रम पैदा हुआ और वे भयभीत हो गए।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने आईएमईआई (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) नंबरों में छेड़छाड़ किया, जिससे कुछ ही घंटों के भीतर एक ही फोन नंबर कई शहरों से आता हुआ दिखाई देने लगा।

उसने बताया कि लगातार तकनीकी विश्लेषण और क्षेत्र में निगरानी के आधार पर दिल्ली के गोयला डेरी में पहले सिम बॉक्स सेटअप लगाए जाने की जानकारी मिली।

पुलिस के मुताबिक दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी के बाद दो कथित स्थानीय गुर्गों शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो अवैध ढांचे का संचालन कर रहे थे।

पुलिस ने बताया कि जब्त किए गए उपकरणों की फोरेंसिक जांच से ताइवान के नागरिक आई सुंग चेन (30) की पहचान हुई, जो गिरोह का मुख्य तकनीकी संचालक था। उसे 21 दिसंबर को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि चेन की गिरफ्तारी के बाद की मुंबई, मोहाली और कोयंबटूर में छापेमारी कर सिम बॉक्स मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया तथा पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने दावा किया कि फोरेंसिक विश्लेषण से 5,000 से अधिक छेड़छाड़ किये गए आईएमईआई नंबर और लगभग 20,000 सिम कार्ड मॉड्यूल से जुड़े हुए पाए गए हैं, और कई राज्यों से साइबर अपराध की शिकायतें मिली हैं जिनमें अनुमानित धोखाधड़ी की राशि 100 करोड़ रुपये है।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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