नई दिल्लीः Vande Bharat: ‘वंदे मातरम‘ पर कांग्रेस के स्टैंड से खड़ा हुआ सियासी विवाद अब बीजेपी-कांग्रेस में ठनी होने की स्थिति में आती दिख रही है। संसद से कानून बनने के बाद माना जा रहा था अब से वंदे मातरम के सभी छंद गाए जाएंगे और राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत को भी बराबर सम्मान से गाया जाएगा, लेकिन कांग्रेस के स्टैंड ने सबको चौका दिया है।
Vande Bharat: गुरुवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में ये तय किया गया कि कांग्रेस अपने सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ दो पैराग्राफ ही गाएगी। कांग्रेस का कहना है कि “हम वंदे मातरम् का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि वही पहले दो छंद गा रहे हैं जिन्हें 1937 में कांग्रेस ने राष्ट्रीय आयोजनों के लिए स्वीकार किया था और जिनमें मातृभूमि की वंदना का सर्वसमावेशी भाव है, लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस के स्टैंड को बीजेपी वंदे मातरम के अपमान के रूप में देख रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे कांग्रेस की तृष्टिकरण की नीति बताकर निशाना साधा है।
दिल्ली में गुरूवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई, जिसमें ”वंदे मातरम” के गायन का मुद्दा छाया रहा, कांग्रेस ने लगातार उठते सवालों और आरोपों के बीच साफ कर दिया कि वो वंदे मातरम के शुरू के सिर्फ दो पैराग्राफ ही गाएगी। कांग्रेस के इस स्टैंड को बीजेपी ने वंदे मातरम के अपमान के रूप में लिया, जिस पर कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग छिड़ गई।
वंदे मातरम के गायन पर छिड़ी लड़ाई दिल्ली के सियासी गलियारों तक सीमित नहीं रही मध्यप्रदेश में भी इसकी आंच महसूस की गई। दिलचस्प बात ये है कि संसद के मानसून सत्र का जब समापन हुआ तब लोकसभा में वंदे मातरम के पूरे गायन के दौरान कांग्रेस सांसद सावधान की मुद्रा में खड़े रहे, लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब 15 अगस्त को सोनिया गांधी के कथित रूप से इसके गायन को रोकने का वीडियो वायरल हुआ, फिर गोवा में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की मौजूदगी में वंदे मातरम के दो ही पैराग्राफ गाए गए। अब जब कांग्रेस ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है तो तय है कि कांग्रेस को संसद से पास कानून की कोई परवाह नहीं है लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा की वंदे मातरम के अपमान को लेकर कांग्रेस नेताओं पर दर्ज केस पर आने वाले दिनों में कोर्ट क्या फैसला सुनाता है।
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