हुमायूं कबीर के कथित वीडियो को लेकर बंगाल में छिड़ा राजनीतिक विवाद, तृणमूल ने की जांच की मांग
हुमायूं कबीर के कथित वीडियो को लेकर बंगाल में छिड़ा राजनीतिक विवाद, तृणमूल ने की जांच की मांग
कोलकाता, नौ अप्रैल (भाषा) हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने पर बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद छिड़ गया। वीडियो में वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संबंध होने और विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने के प्रयासों का कथित तौर पर दावा करते नजर आ रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने संवाददाता सम्मेलन में कथित वीडियो साझा किया और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के साथ कबीर की कथित निकटता के दावों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग की।
पार्टी का आरोप है कि ये दावे बनर्जी को चुनाव में हराने की साजिश का हिस्सा हैं।
‘पीटीआई-भाषा’ स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकी है। वीडियो में, कबीर को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वह बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए ‘‘किसी भी हद तक’’ जाने को तैयार हैं और वह शुभेंदु अधिकारी सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं।
पिछले साल के अंत में तृणमूल द्वारा निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ की स्थापना करने वाले कबीर के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने पीएमओ से संपर्क किया था और उन्हें भाजपा शासित अन्य राज्यों के नेताओं के साथ समन्वय करने की सलाह दी गई थी।
वीडियो में कथित तौर पर कबीर यह कहते हुए भी नजर आ रहे हैं कि उनकी रणनीति सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में करने के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस तरह के बदलाव से भाजपा को चुनावी रूप से फायदा हो सकता है।
उन्होंने कथित तौर पर इस रणनीति को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लागू करने के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता का उल्लेख किया है।
इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि कबीर अल्पसंख्यक मतदाताओं को गुमराह करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
कबीर से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं और संवेदनाओं को हल्के में न लेने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो राज्य में चुनावी परिणाम को प्रभावित करने के उद्देश्य से रची गई एक ‘‘गहरी साजिश का पर्दाफाश’’ करता है।
हकीम ने आरोप लगाया कि वीडियो में कबीर को यह कहते हुए सुना गया कि बाबरी मस्जिद के मुद्दे को उठाना मुस्लिम वोटों को जुटाने में अधिक प्रभावी होगा, भले ही अंततः यह फलीभूत न हो।
तृणमूल के एक अन्य वरिष्ठ नेता और मंत्री अरूप बिस्वास ने कहा, ‘‘भाजपा परोक्ष रूप से जनादेश में हेरफेर करने की कोशिश कर रही है। अगर यह वीडियो सच है, तो यह हमारे आरोपों की पुष्टि करता है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि एआईएमआईएम और उसके अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि वीडियो किसने शूट किया, हकीम ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि भाजपा के सत्ता में आने की स्थिति में उन्होंने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की है।’’
तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने कहा, ‘‘हम इस मामले की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की मांग करते हैं।’’
कबीर और भाजपा से इस मामले पर तत्काल संपर्क नहीं हो सका है।
भाषा प्रशांत सुभाष
सुभाष

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