विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाझथु’ को तीसरे स्थान पर रखे जाने से राजनीतिक विवाद

विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाझथु’ को तीसरे स्थान पर रखे जाने से राजनीतिक विवाद

विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाझथु’ को तीसरे स्थान पर रखे जाने से राजनीतिक विवाद
Modified Date: May 10, 2026 / 09:14 pm IST
Published Date: May 10, 2026 9:14 pm IST

(फोटो के साथ)

चेन्नई, 10 मई (भाषा) तमिलनाडु में सी. जोसफ विजय के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वाझथु’ (प्रार्थना) गीत को ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ के बाद तीसरे स्थान पर गाया गया जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

राज्य में सरकारी कार्यक्रमों के प्रारंभ में परंपरागत रूप से इस प्रार्थना गीत को गाया जाता है।

‘तमिल थाई वाझथु’ की तुलना में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ को दी गई प्राथमिकता ने राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने ‘तमिल थाई वाझथु’ को तीसरे स्थान पर रखने के फैसले की निंदा की है।

वीरपांडियन की पार्टी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), वीसीके (विदुथलाई चिरूथईगल काची) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ मिलकर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार बनाने में समर्थन दिया है।

उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि तमिल प्रार्थना पारंपरिक रूप से सरकारी समारोहों की शुरुआत में गाई जाती रही है और इसे उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जानी चाहिए।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने एक बयान में राज्य सरकार से सभी आधिकारिक कार्यक्रमों और समारोहों में ‘तमिल थाई वाझथु’ को उचित महत्व देने का भी आह्वान किया।

वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस घटना की निंदा की।

चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाझथु’ से पहले ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ गाया गया।

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भव्य समारोह में विजय को पद की शपथ दिलाई।

इसी तरह, शोलावंदन विधानसभा क्षेत्र से चुने गए टीवीके विधायक एम.वी. करुपैया के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘तमिल थाई वाझथु’ को तीसरे स्थान पर रखा गया।

भाषा सुरभि संतोष

संतोष


लेखक के बारे में