देहरादून, 29 मार्च (भाषा) देहरादून में हंगामा करने के आरोप में पुलिस द्वारा हिरासत में लिये गए प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवान की रायपुर थाने में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने जांच के आदेश दिए और रायपुर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया।
उन्होंने बताया कि पीआरडी जवान की पहचान सुनील रतूड़ी (45) के रूप में हुई है।
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलूनी ने बताया कि लाडपुर स्थित महादेव पेट्रोल पंप से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति वाहन में पेट्रोल भरवाने के बाद रुपये नहीं दे रहा है और नशे की हालत में कर्मचारियों के साथ बदसलूकी कर रहा है।
उन्होंने बताया कि सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन न मानने पर उसे थाने ले जाया गया और उसके वाहन को जब्त कर लिया।
बलूनी ने बताया कि थाने में उसका नाम-पता दर्ज करने के बाद एल्कोमीटर से जांच की गई, जिसमें रतूड़ी के नशे में होने की पुष्टि हुई जिसे बाद उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की संबद्ध धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि थाने में भी लगातार शोर-शराबा करने और कार्य में बाधा डालने के कारण पुलिसकर्मियों ने उसे हवालात में बंद कर दिया।
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने बताया कि कुछ देर बाद ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जांच की तो वह बेसुध अवस्था में पड़ा मिला। उसे तुरंत हवालात से निकालकर कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डोबाल ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘पूरे घटनाक्रम की न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर पर जांच सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल से कराया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए रायपुर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है और मामले की जांच पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को सौंपी गई है तथा उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, रतूड़ी के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसने पुलिस की मौजूदगी में आत्महत्या की और इसके लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाषा दीप्ति खारी
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