दुरुपयोग रोकने के लिए प्रेगाबालिन को अनुसूची एच1 में शामिल किया गया

दुरुपयोग रोकने के लिए प्रेगाबालिन को अनुसूची एच1 में शामिल किया गया

दुरुपयोग रोकने के लिए प्रेगाबालिन को अनुसूची एच1 में शामिल किया गया
Modified Date: May 22, 2026 / 01:24 pm IST
Published Date: May 22, 2026 1:24 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अत्यधिक दर्द और तंत्रिका संबंधी कुछ समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा प्रेगाबालिन के दुरुपयोग की खबरों के बीच इसे कड़ी निगरानी वाली अनुसूची एच1 श्रेणी में शामिल कर दिया है।

मंत्रालय ने 20 मई को एक राजपत्र अधिसूचना के जरिये प्रेगाबालिन को औषधि नियम, 1945 की अनुसूची एच1 में शामिल किया।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘कुछ राज्यों से, खासकर युवाओं द्वारा प्रेगाबालिन के दुरुपयोग संबंधी खबरें मिलने के मद्देनजर यह फैसला किया गया है।’’

अत्यधिक दर्द, ‘न्यूरोपैथी’, ‘फाइब्रोमायल्जिया’ और तंत्रिका तंत्र संबंधी कुछ समस्याओं के इलाज के लिए दी जाने वाली इस दवा का कथित तौर पर इसके मादक और मानसिक रूप से अलगाव का अहसास कराने वाले प्रभावों के कारण दुरुपयोग किया जाता रहा है।

मंत्रालय ने देश के कुछ हिस्सों में प्रेगाबालिन के अवैध भंडार और बिक्री का पता चलने का भी हवाला दिया।

यह दवा पहले औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के तहत अनुसूची एच के अंतर्गत विनियमित थी।

नयी श्रेणी के तहत, अब यह दवा केवल पंजीकृत चिकित्सक (आरएमपी) द्वारा जारी वैध पर्चे के आधार पर ही बेची जा सकेगी।

मंत्रालय के बयान में कहा गया कि खुदरा विक्रेताओं को अब पर्चों और बिक्री का विवरण दर्ज करने के लिए अलग रजिस्टर रखना होगा, जबकि विनिर्माताओं को उत्पाद की पैकेजिंग पर निर्धारित ‘अनुसूची एच1 दवा चेतावनी’ लेबल प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

मंत्रालय ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने और अनुपालन नहीं करने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और संबंधित नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बयान के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य ‘‘आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही बढ़ाना, अनधिकृत पहुंच रोकना, पर्चों की निगरानी बढ़ाना, अवैध तस्करी पर अंकुश लगाना और दवाओं के दुरुपयोग से जन स्वास्थ्य की रक्षा करना’’ है।

भाषा सिम्मी वैभव

वैभव


लेखक के बारे में