त्रिपुरा में एसआईआर प्रक्रिया के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू : मुख्यमंत्री माणिक साहा
त्रिपुरा में एसआईआर प्रक्रिया के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू : मुख्यमंत्री माणिक साहा
अगरतला, 21 मार्च (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू हो गए हैं।
भाजपा द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में भाग लेने के बाद पत्रकारों से साहा ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया शुरू की है कि कोई भी वैध मतदाता छूट न जाए। हमारे राज्य में अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है, हालांकि औपचारिक अधिसूचना अभी जारी की जानी बाकी है।’
‘शहीद भगत सिंह यूथ हॉस्टल’ में आयोजित कार्यशाला में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और पूर्व सांसद विनोद सोनकर के अलावा राज्य के मंत्री और पार्टी के नेता भी उपस्थित थे।
साहा ने कहा, ‘आज की कार्यशाला में हमने इस बात पर चर्चा की कि पार्टी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की किस प्रकार सहायता कर सकती है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वैध मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।’
उन्होंने कहा, ‘त्रिपुरा तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी पात्र मतदाताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का उचित अवसर मिले।’
राज्य में निजी विश्वविद्यालयों को अनुमति देने को लेकर विपक्षी दलों की कड़ी आपत्तियों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम जैसे छोटे राज्य में 23 विश्वविद्यालय हैं।
उन्होंने कहा, ‘अगर आठ लाख की आबादी वाले सिक्किम में 23 विश्वविद्यालय हो सकते हैं, तो त्रिपुरा में ऐसे और संस्थान क्यों नहीं हो सकते? आज पूर्वोत्तर राज्यों में सिक्किम का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक है।’
विपक्षी माकपा और कांग्रेस के सदस्य शुक्रवार को विधानसभा से बाहर चले गए। उन्होंने तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की अनुमति देने वाले तीन विधेयकों का विरोध किया।
साहा ने कहा कि अगर त्रिपुरा में नए विश्वविद्यालय खुलते हैं, तो राज्य के बाहर के छात्र यहां पढ़ने आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘इससे हमारी अर्थव्यवस्था को निश्चित रूप से मदद मिलेगी। हम नए विश्वविद्यालयों के कामकाज पर कड़ी नजर रखेंगे। यदि उनके पास यूजीसी की मंजूरी या पंजीकरण नहीं है, तो सरकार उन्हें काम करने की अनुमति नहीं देगी।’
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप

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