ओडिशा में कृषि पर्व ‘नुआखाई’ पर राष्ट्रपति मुर्मू ने बधाई दी

ओडिशा में कृषि पर्व ‘नुआखाई’ पर राष्ट्रपति मुर्मू ने बधाई दी

ओडिशा में कृषि पर्व ‘नुआखाई’ पर राष्ट्रपति मुर्मू ने बधाई दी
Modified Date: September 15, 2026 / 01:09 pm IST
Published Date: September 15, 2026 1:09 pm IST

भुवनेश्वर/संबलपुर, 15 सितंबर (भाषा) पश्चिम ओडिशा के लोगों ने मंगलवार को प्रमुख कृषि पर्व नुआखाई मनाया और इस अवसर पर परिवारों ने मौसम की पहली फसल अपने आराध्य देवता को अर्पित की तथा बड़ों का आशीर्वाद लिया।

यह पर्व मुख्य रूप से संबलपुर, बरगढ़, झारसुगुडा, बोलांगीर, कालाहांडी, नुआपाड़ा, नबरंगपुर, देवगढ़ और सुंदरगढ़ जिलों में मनाया जाता है, लेकिन इस बार बौध और अंगुल के कुछ हिस्सों में भी इसे मनाया गया।

राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग अपने परिवारों के साथ पर्व मनाने के लिए अपने पैतृक स्थानों पर लौटे।

मूल रूप से ओडिशा की रहने वालीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने लोगों को इस मौके पर बधाई दी।

मुर्मू ने कहा कि नुआखाई सिर्फ एक पारंपरिक पर्व नहीं है बल्कि यह सामुदायिक भोज और दोस्तों के साथ मिलकर सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव का भी प्रतीक है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि इस पर्व से आपसी सद्भाव एवं सौहार्द और मजबूत होगा। नुआखाई के मौके पर मैं सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करती हूं।’’

माझी ने लोगों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की और कहा कि मां समलेश्वरी का आशीर्वाद उनके जीवन को खुशियों से भर दे।

पटनायक ने लोगों को ‘‘नुआखाई जुहार’’ की शुभकामनाएं दीं, जबकि कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी इस अवसर पर लोगों को बधाई दी।

नुआखाई पर्व पारंपरिक रूप से अच्छी फसल, पर्याप्त बारिश और खेती के लिए अनुकूल मौसम के लिए आभार व्यक्त करने के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर खेतों से प्राप्त पहली फसल आराध्य देवता को अर्पित की जाती है।

प्रत्येक परिवार का मुखिया कुल देवता की पूजा करता है और नयी फसल से प्राप्त चावल तथा अन्य खाद्य सामग्री अर्पित करता है। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है। पूजा के बाद परिवार के लोग पारंपरिक रूप से एक साथ भोजन करते हैं।

पर्व की एक प्रमुख परंपरा ‘नुआखाई जुहार’ है, जिसके तहत परिवार के बड़े अपने से छोटे सदस्यों को दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। गांवों में लोग अपने पड़ोस के बुजुर्गों से मिलकर भी उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।

सामाजिक संगठन और सामुदायिक समूह शाम को ‘नुआखाई भेंटघाट’ कार्यक्रम आयोजित करते हैं जबकि इस मौके पर गांवों और कस्बों में सांस्कृतिक और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव


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