नागरिकता का दर्जा तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी होनी चाहिए: उच्चतम न्यायालय
नागरिकता का दर्जा तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी होनी चाहिए: उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि नागरिकता की स्थिति का निर्धारण एक निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें कुछ व्यक्तियों को विदेशी घोषित करने के आदेशों की पुष्टि की गई थी।
इसने इस बात पर जोर दिया कि कानून के समक्ष समानता, कानूनों का समान संरक्षण, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय क्षेत्र के भीतर हर व्यक्ति को प्राप्त है।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उसने अपीलकर्ताओं द्वारा किए गए नागरिकता संबंधी दावों के गुण-दोष की पड़ताल नहीं की है।
न्यायालय ने संबंधित न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया कि वे उच्च न्यायालय या न्यायाधिकरणों द्वारा की गई किसी भी पिछली टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना, इन मामलों पर नए सिरे से निर्णय लें।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि सरकार का इसमें वैध और अनिवार्य हित है कि वह यह सुनिश्चित करे कि जो लोग कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता का दावा करने के हकदार नहीं हैं, वे प्रक्रिया के दुरुपयोग, झूठे दावों या प्रक्रियात्मक देरी का लाभ उठाकर ऐसा दर्जा प्राप्त न कर सकें।
पीठ ने कहा, ‘‘इसके साथ ही, नागरिकता की स्थिति का निर्धारण एक ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए जो निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत हो।’’
उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को रद्द करते हुए, पीठ ने मामलों को कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने के लिए संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों के पास वापस भेज दिया।
शीर्ष अदालत ने असम के विदेशी न्यायाधिकरणों की कार्यवाही से जुड़ी कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इनमें से कुछ मामलों की शुरुआती सुनवाई तत्कालीन अवैध प्रवासी (निर्धारण) न्यायाधिकरणों (आईएमडीटी) के समक्ष की गई थी।
भाषा
नेत्रपाल सुरेश
सुरेश

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