उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों से जुड़े एमओपी में संशोधन की प्रक्रिया पर विचार जारी : सरकार

उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों से जुड़े एमओपी में संशोधन की प्रक्रिया पर विचार जारी : सरकार

उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों से जुड़े एमओपी में संशोधन की प्रक्रिया पर विचार जारी : सरकार
Modified Date: February 5, 2026 / 04:38 pm IST
Published Date: February 5, 2026 4:38 pm IST

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) सरकार ने राज्यसभा को बताया कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी ‘ज्ञापन प्रक्रिया’ (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर … एमओपी) को संशोधित करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है और इसके पूरा होने के बाद ही इस संबंध में आगे के कदम उठाए जाएंगे।

विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बृहस्पतिवार को उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना करने और इसके स्वरूप को लेकर भी परामर्श जारी है।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने पूरक प्रश्न के तहत जानना चाहा कि क्या सरकार न्यायिक सुधार ला रही है और क्या राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को फिर से लाया जाएगा? इस पर मेघवाल ने कहा कि सभी जानते हैं कि एनजेएसी विधेयक संसद द्वारा पारित किया गया था, लेकिन बाद में इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई और इसे निरस्त कर दिया गया।

मेघवाल ने सदन को बताया, “इसके बाद एमओपी को संशोधित करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है और यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।”

देश में राष्ट्रीय न्यायिक सेवा शुरू किए जाने से संबंधित एक अन्य प्रश्न पर मंत्री ने कहा, “हमारे संविधान के अनुच्छेद 312 में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रावधान है और इस मुद्दे पर न्यायाधीशों के सम्मेलनों में भी कई बार चर्चा हो चुकी है।”

उन्होंने कहा, “यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है। इसे किस स्वरूप में लाया जाए, इस पर परामर्श चल रहा है। यह मामला विचाराधीन है।”

विधि मंत्री ने कहा कि हमारे लोकतंत्र में न्यायपालिका शासन व्यवस्था का एक स्वतंत्र अंग है और सभी मुद्दों से निपटने में सक्षम है।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। हम न्यायपालिका के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि न्यायाधीशों को ऐसा अनुकूल वातावरण मिले, जिससे वे जनता को न्याय प्रदान कर सकें।”

मंत्री ने यह भी कहा कि लंबित मामलों का निपटारा करना न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि सरकार ने निचली अदालतों की संख्या बढ़ाने में सहायता की है।

मेघवाल ने सदन को बताया, “2014 में जिला एवं सत्र अदालतों में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 19,518 थी और इसके बाद हमने 6,376 पद जोड़े। अब निचली न्यायपालिका में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 25,894 हो गई है।”

अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम. थंबीदुरै के मद्रास उच्च न्यायालय का नाम बदलने संबंधी पूरक प्रश्न पर मंत्री ने कहा, “देश में कई उच्च न्यायालय ऐसे हैं जिनके पुराने नाम हैं। ये सभी मुद्दे विचाराधीन हैं।”

मामलों के लंबित होने संबंधी एक सवाल के लिखित उत्तर में विधि मंत्री ने कहा कि अदालतों में मामलों के लंबित होने के कई कारण होते हैं, जिनमें तथ्यों की जटिलता, साक्ष्यों की प्रकृति, बार, जांच एजेंसियों, गवाहों और याचिकाकर्ताओं का सहयोग, भौतिक ढांचे और सहायक अदालती स्टाफ की उपलब्धता तथा न्यायाधीशों की कमी शामिल है।

उन्होंने कहा, “मामलों का निपटारा करना न्यायपालिका का विशेषाधिकार क्षेत्र है। हालांकि, केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मामलों के शीघ्र निपटारे और लंबित अवधि कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और न्यायपालिका द्वारा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अनुकूल व्यवस्था उपलब्ध कराने हेतु कई पहल की हैं।”

मेघवाल ने कहा कि सरकार समय-समय पर उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पद भर रही है। उन्होंने बताया कि एक मई 2014 से 19 जनवरी 2026 के बीच उच्चतम न्यायालय में 72 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, जबकि इसी अवधि में उच्च न्यायालयों में 1,162 नए न्यायाधीश नियुक्त किए गए और 820 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी बनाया गया।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या मई 2014 में 906 थी, जो अब बढ़कर 1,122 हो गई है।

मंत्री ने कहा कि जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पदों को भरना संबंधित उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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