मूल अपराध की प्राथमिकी में मिली सुरक्षा स्वत: पीएमएलए मामले में लागू नहीं होगी: अदालत

मूल अपराध की प्राथमिकी में मिली सुरक्षा स्वत: पीएमएलए मामले में लागू नहीं होगी: अदालत

Modified Date: August 22, 2026 / 12:52 pm IST
Published Date: August 22, 2026 12:52 pm IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि मूल अपराध से जुड़ी प्राथमिकी में मिली सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि वह धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही अलग और स्वतंत्र कार्यवाही में भी लागू होगी।

उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी पीएमएलए मामले में अभियोजन का सामना कर रहे एक कारोबारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की।

इसने याचिकाकर्ता की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि गिरफ्तारी की उसकी आशंका पर उच्चतम न्यायालय द्वारा मूल अपराध की प्राथमिकी में उसे दी गई सुरक्षा के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति मधु जैन ने 18 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘मूल अपराध की प्राथमिकी में दी गई सुरक्षा उसी प्राथमिकी के संदर्भ में लागू होती है और इसे अपने आप पीएमएलए के तहत चल रही अलग एवं स्वतंत्र कार्यवाही तक विस्तारित नहीं माना जा सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर मौजूदा कार्यवाही में गिरफ्तारी से पहले की सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता कि उसे मूल अपराध में ऐसी सुरक्षा प्रदान की गई है।’’

अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के अपराध होते हैं और इसलिए जमानत याचिका पर विचार करते समय इनके लिए अलग दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत होती है।

यह मामला ‘बाबाजी फाइनेंस ग्रुप’ के राम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के आरोप में मामला दर्ज किया था।

ईडी ने दिल्ली स्थित आरोपी के आवास पर तलाशी के बाद यह माना था कि याचिकाकर्ता धनशोधन मामले में मुख्य साजिशकर्ता है।

जांच एजेंसी के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को राहत के लिए पहले सत्र अदालत का रुख करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ और बार-बार समन जारी होने के बावजूद जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि मामला गंभीर धनशोधन आरोपों से जुड़ा है और कथित अपराध से अर्जित धन की पूरी श्रृंखला की विस्तृत जांच जरूरी है।

भाषा शोभना रंजन

रंजन


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