जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, व्यवस्था की ‘नाकामियों’ को भी दर्शाता है: आरएसएस
जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, व्यवस्था की ‘नाकामियों’ को भी दर्शाता है: आरएसएस
विशाखापत्तनम, 21 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को महज भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जा सकता, बल्कि ये व्यवस्था की “नाकामियों” को भी दर्शाते हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में शुक्रवार को संपन्न संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के बाद आरएसएस नेता सीआर मुकुंद ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देशभर में व्यवस्थाओं में कुछ कमियां हैं, लेकिन बदलाव व्यवधान या तोड़फोड़ के जरिये नहीं लाया जा सकता।
मुकुंद ने कहा कि बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में हाल में हुए युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों पर एक बड़ी समस्या के संकेत के तौर पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को उन चिंताओं का समाधान करना चाहिए, जो नीट प्रश्नपत्र लीक जैसे किसी एक मुद्दे से कहीं बढ़कर हैं।
मुकुंद ने कहा कि तेजी से बदलते समाज में शिक्षा, रोजगार और आकांक्षाएं व्यापक चर्चा का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को देखते हुए मुद्दों को रचनात्मक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए और समाज तथा सरकार को मिलकर काम करना चाहिए।
जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन और उसके पीछे की वजहों से जुड़े सवाल पर मुकुंद ने व्यापक प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये प्रदर्शन दिखाते हैं कि मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें “कुछ खामियां और व्यवस्था की पूर्ण विफलता” शामिल है।
उन्होंने कहा, “इसलिए संघ और उससे प्रेरित सभी संगठन चाहते हैं कि व्यवस्थाएं ठीक ढंग से चलें। इसके लिए सरकार को कुछ कदम उठाने होंगे और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए समाज को भी जागरूक करना होगा।”
मुकुंद ने कहा, “जब हम युवाओं और उनकी चिंताओं की बात करते हैं… तो एक मुद्दा यह है कि युवा व्यवस्था में मौजूद कमियों को लेकर चिंतित हैं, चाहे वह नीट का मामला हो या कोई अन्य मुद्दा। हमें युवाओं की चिंताओं और भविष्य को लेकर उनके मन में मौजूद आशंका का समाधान करना चाहिए।”
आरएसएस नेता ने कहा, “यह केवल नीट या किसी एक सरकार से जुड़ा मामला नहीं है; देशभर की व्यवस्थाओं में कई कमियां हैं।”
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में मौजूद कमियों से निपटने के लिए सरकार और समाज, दोनों को मिलकर काम करने की जरूरत है और इसी नजरिये से आरएसएस की बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया।
मुकुंद ने कहा, “बदलाव व्यवधान या तोड़फोड़ के जरिये नहीं लाया जा सकता। चीजों को रचनात्मक और सकारात्मक नजरिये से देखा जाना चाहिए। हमें चीजों को ठीक करने की कोशिश करनी चाहिए। जैसा कि मैंने कहा, युवाओं के मन में इस बारे में चिंताएं हैं। समाज को इसे समझना चाहिए और सरकार को कदम उठाने चाहिए और वह कदम उठा भी रही है।”
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) सहित अन्य परीक्षाओं में अनियमितता के आरोपों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने 20 जून को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था। 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी।
भाषा पारुल संतोष
संतोष

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