पंजाब: पड़ोसी देश पर मादक पदार्थ भेजने का आरोप, स्कूलों से नशा-विरोधी अभियान की अपील

पंजाब: पड़ोसी देश पर मादक पदार्थ भेजने का आरोप, स्कूलों से नशा-विरोधी अभियान की अपील

पंजाब: पड़ोसी देश पर मादक पदार्थ भेजने का आरोप, स्कूलों से नशा-विरोधी अभियान की अपील
Modified Date: April 18, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: April 18, 2026 9:48 pm IST

पठानकोट/अमृतसर, 18 अप्रैल (भाषा) पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने शनिवार को विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षकों से युवाओं को नशे से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और राज्यव्यापी नशा-विरोधी अभियान में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया।

कटारिया ने पड़ोसी देश पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह पंजाब में नशा फैलाकर युवाओं को बर्बाद करने पर तुला हुआ है, क्योंकि वह भारत का सीधे तौर पर मुकाबला करने में असमर्थ है।

राज्यपाल ने पठानकोट जिले के बंधानी स्थित श्री साई कॉलेज में सीमावर्ती क्षेत्र के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए उनसे विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया और संस्थानों को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया।

पठानकोट के तीन-दिवसीय दौरे पर आए कटारिया ने ब्लॉक स्तर की समितियों के सदस्यों से बातचीत की और ‘नशा मुक्ति अभियान’ के तहत आयोजित पदयात्रा में भाग लिया।

मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस. भोला ने बैठक के दौरान सांख्यिकीय आंकड़े साझा किए और युवाओं में नशे की लत को रोकने की रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

आईपीएस अधिकारी अखिल चौधरी ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने में प्रवर्तन उपायों और स्वापक-रोधी कार्य बल (एएनटीएफ) की भूमिका पर प्रकाश डाला।

विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भी नशे के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए सुझाव साझा किए, जिनमें जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया।

कटारिया ने सभा को संबोधित करते हुए शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा को केवल अकादमिक विषयों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को समझना भी शामिल होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर शिक्षक विद्यार्थियों को नशे के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक करें, तो इसके परिणाम परिवर्तनकारी हो सकते हैं।”

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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