नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) जंगलों की सीमा से लगे गांवों की फसलों को जानवरों से होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के सदानंद महालू शेट तानवड़े ने सरकार से मांग की कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए तानवड़े ने कहा कि गोवा में लोग जानवरों का सम्मान करते हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। ‘‘लेकिन आए दिन वे अपनी फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान हो जाते हैं। उनकी फसल तो मंडी तक भी नहीं पहुंच पाती।’’
उन्होंने कहा कि कई लोगों को इस तरह से फसल के नुकसान पर मुआवजा मिलने के बारे में पता ही नहीं है और जिन्हें जानकारी है, वे कानूनी कार्रवाई और वन विभाग द्वारा मांगे दस्तावेजों का इंतजाम करते हुए परेशान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद बड़ी मुश्किल से मुआवजा मिलता है।
तानवड़े ने मांग की कि सरकार इस तरह की स्थिति के लिए वन विभाग को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे ताकि लोगों को समय पर मुआवजा मिल सके। उन्होंने कहा, ‘‘फसलों के बचाव के लिए भी कदम उठाने चाहिए। इसके लिए समुचित अवसंरचना तैयार की जानी चाहिए। वन क्षेत्र की सीमा पर सौर एवं इलेक्ट्रिक तारबंदी की जानी चाहिए ताकि जंगल से जानवर गांवों की ओर न आ सकें।’’
इसी पार्टी के ब्रजलाल ने हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले पुलिस पदकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा पुलिस कर्मियों को मुख्य रूप से वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए पदक दिए जाते हैं। ये पदक दो श्रेणियों में.. राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक (पीपीएमजी) और पुलिस वीरता पदक (पीएमजी) दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन पदकों को प्राप्त करने वालों को कई सुविधाएं मिलती हैं।
ब्रजलाल ने कहा कि 2013 में, पीपीएमजी पदक पाने वालों का भत्ता तीन हजार रुपये से बढ़ाकर छह हजार रुपये कर दिया गया जबकि पीएमजी पदक पाने वालों का भत्ता अभी भी दो हजार रुपये ही है। उन्होंने पीएमजी पदक पाने वालों का भत्ता बढ़ाकर चार हजार रुपये करने की मांग की।
शून्यकाल में ही भाजपा के ही संजय सेठ, सिकंदर कुमार, बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, सुरेन्द्र सिंह नागर, एस सेल्वागनबेथी और रागैया कृष्णा, जदयू के संजय यादव, राजद के मनोज कुमार झा, बसपा के रामजी, बीजद के मुजीबुल्ला खान, अन्नाद्रमुक के आई एस इनबादुरई, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और निर्दलीय सदस्य गुलाम अली ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा मनीषा वैभव
वैभव