जयपुर, 27 मई (भाषा) राजस्थान के धौलपुर स्थित चंबल घड़ियाल अभयारण्य के पालीघाट क्षेत्र में घड़ियाल के लगभग 100 बच्चों का जन्म इस लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वन अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित इस अभयारण्य में घड़ियालों के बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है और टीमें नियमित गश्त कर रही हैं, संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर रही हैं तथा जन्म वाले क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित कर रही हैं।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के उपवन संरक्षक मानस सिंह ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से घड़ियाल संरक्षण में सहयोग करने और नदी तटों व जन्मस्थलों के पास अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की।
सिंह ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “घड़ियाल गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है और इस मौसम में पालीघाट में बड़ी संख्या में बच्चों का सुरक्षित रूप से जन्म लेना एक उत्साहजनक संकेत है।”
उन्होंने बताया,‘‘ शुरुआती सप्ताह नवजात घड़ियालों के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं क्योंकि इस दौरान सुरक्षा में जरा सी भी चूक गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।”
वन विभाग के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत में पालीघाट और उसके आसपास के इलाकों में रेतीले किनारों पर बने 22-25 स्थलों में घड़ियालों ने लगभग 500 से 600 अंडे दिए थे। विभाग ने बताया कि घड़ियालों के अंडों से बच्चे निकलने में लगभग दो महीने लगते हैं और मई के आखिरी सप्ताह में ये निकलना शुरू हो जाते हैं। सिंह ने बताया, “आने वाले दिनों में घड़ियालों के अन्य बच्चों के अंडों से निकलने की उम्मीद है।”
उन्होंने बताया, “जहां इन घड़ियाल के बच्चों ने जन्म लिया है, उस क्षेत्र के चारों ओर तीन तरफ से सुरक्षात्मक बाड़ लगायी गयी हैं ताकि जंगली जानवर अंडों और नवजात घड़ियालों पर हमला न कर सकें। कई स्थानों पर मानवीय गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।”
अधिकारी ने बताया कि पालीघाट में 27.25 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक घड़ियाल पालन केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जिससे संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि चंबल अभयारण्य में वयस्क घड़ियालों की संख्या वर्तमान में 130 से अधिक है।
भाषा जितेंद्र नरेश
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