गुवाहाटी, 27 मई (भाषा) असम विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के एकमात्र विधायक शरमन अली अहमद ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन किया और आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने यह प्रस्तावित कानून “दुर्भावनापूर्ण इरादे” से पेश किया है।
यूसीसी विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए अहमद ने कहा कि सरकार ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता हो।
हालांकि उन्होंने मसौदा विधेयक के कुछ प्रावधानों का स्वागत किया, जिनमें विवाह की न्यूनतम आयु तय करना और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करना शामिल है।
टीएमसी विधायक ने कहा कि कुरान में एक से ज़्यादा शादियों के बारे में जो बात कही गई है, उसका ‘गलत मतलब निकाला गया है’।
उन्होंने कहा, “मैं यूसीसी का समर्थन करने के लिए तैयार हूं, लेकिन कुछ मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।’’
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म से परे एक समान कानून लागू करने के उद्देश्य से असम सरकार ने सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक में बहुविवाह पर रोक लगाने और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, विधेयक में यह भी कहा गया है कि असम में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर यह कानून लागू नहीं होगा।
विधेयक में कई दंडात्मक प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें द्विविवाह या बहुविवाह के लिए सात साल तक की सजा और लिव-इन संबंध का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने तक की जेल शामिल है।
अहमद ने कहा, “सरकार यह विधेयक दुर्भावनापूर्ण मंशा से लाई है और इसके विरोध के रूप में मैं सदन से बहिर्गमन करता हूं।”
उन्होंने दावा किया कि यूसीसी के कुछ प्रावधान, जैसे कोई व्यक्ति किससे विवाह कर सकता है, यह कुरान की आयतों के खिलाफ हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘कुरान और उसमें लिखी गयी बातें ही सर्वोपरि हैं और इसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिये ।’’
विधायक ने दावा किया कि सरकार “राज्य के नीति निदेशक तत्वों का सहारा लेकर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कानून” नहीं ला सकती।
उन्होंने कहा, “सरकार को चाहे जितना जनादेश मिला हो, वह संविधान को दरकिनार नहीं कर सकती।”
अहमद ने यह सवाल भी उठाया कि यदि प्रस्तावित कानून वास्तव में ‘समान’ है, तो फिर आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर क्यों रखा गया है।
भाषा रंजन नरेश
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