राजस्थान : नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा ने बाजी मारी
राजस्थान : नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा ने बाजी मारी
जयपुर, 21 सितंबर (भाषा) राजस्थान में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव में सोमवार को बाजी मार ली। पार्टी 197 नगर निकायों में अपना अध्यक्ष बनाने में कामयाब रही।
राजस्थान में 301 नगर निकायों के अध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव के सोमवार तक घोषित परिणामों के अनुसार, 197 निकायों में भाजपा के और 94 निकायों में कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं।
आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, सात नगर निकायों में निर्दलीय उम्मीदवार अध्यक्ष बने हैं, जबकि आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने एक-एक नगर निकाय में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है।
राज्य में सोमवार को 273 नगर निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए। इस चरण में जिन 305 नगर निकायों में बोर्ड का गठन हुआ है, उनमें से 32 के प्रमुख निर्विरोध चुने गए।
निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन पार्षद चुनावों की तुलना में काफी बेहतर रहा। पार्षद चुनावों में भाजपा ने 10,244 वार्ड में से 4,182 जीते थे। कांग्रेस ने 3,619 वार्ड और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड में जीत हासिल की थी।
कुल निर्वाचित पार्षदों में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार शामिल होने और कई निकायों में खंडित जनादेश (किसी पार्टी को भी स्पष्ट बहुमत न मिलने) के कारण निकाय प्रमुख पदों के चुनाव के समीकरण बदले। निर्दलीय उम्मीदवारों ने धौलपुर नगर परिषद, हनुमानगढ़ नगर परिषद और सादुलशहर, सूरजगढ़, टोडाभीम, रियांबाड़ी व फतेहनगर-सनवाड़ नगर पालिका में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
‘आप’ की शीतल राठौड़ ने बारां नगर परिषद में सभापति का पद जीता। माकपा के बजरंगलाल ने बीकानेर जिले की नोखा नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। आरएलपी की अलका ने नागौर जिले की मुंडवा नगर पालिका में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक सात नगर निगमों के महापौर चुन लिए गए हैं, जिनमें से छह-अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली और उदयपुर-भाजपा के हैं। वहीं, बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस प्रत्याशी ने महापौर चुनाव में जीत दर्ज की है।
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे थे। हालांकि, महापौर पद के चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार अनामिका शर्मा ने 43 वोट से चुनाव जीता।
अलवर नगर निगम में भाजपा ने 65 वार्ड में से 28 में और कांग्रेस ने 23 में जीत हासिल की थई, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 13 और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक सीट जीती थी। यहां भाजपा की सुमन लता अग्रवाल ने 42 वोट से महापौर पद का चुनाव जीता।
पाली में कांग्रेस ने 65 वार्ड में से 29, भाजपा ने 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 वार्ड जीते। हालांकि, यहां भी भाजपा उम्मीदवार नमिता बुबकिया ने 33 वोट से महापौर चुनाव जीता।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह नगर भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव विशेष रूप से अधिक रहा। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्ड में से 36 में निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे और बहुमत के लिए जरूरी 33 के आंकड़े को पार कर लिया था। भाजपा ने यहां 20 और कांग्रेस ने सात सीट जीती थीं। बसपा और आरएलपी ने एक-एक वार्ड जीता था। भरतपुर में भाजपा के पास केवल 20 पार्षद होने के बावजूद उसकी उम्मीदवार अनुराधा सिंह निर्विरोध महापौर चुनी गईं।
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में महापौर पद, जबकि सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मतदान 25 सितंबर को होना है। राज्य में कुल 309 शहरी स्थानीय निकाय हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन नतीजों से राज्य में भजनलाल शर्मा नीत सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों पर जनता की मुहर लगी है।
राठौड़ ने संवाददाताओं से कहा, “राजस्थान की जनता ने हमें भरपूर आशीर्वाद दिया है। जनता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से किए गए विकास कार्यों पर अपनी मुहर लगाई है।”
राठौड़ ने चुनाव परिणामों का श्रेय केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार के कामकाज को दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा बीकानेर सहित उन जगहों पर अपने प्रदर्शन की समीक्षा करेगी, जहां पार्टी के प्रत्याशी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।
राठौड़ ने कहा, “हम सभी 309 नगर निकाय में जीतना चाहते थे। जहां भी कमियां रहीं, हम उनकी समीक्षा करेंगे और सुधारात्मक कदम उठाएंगे।”
नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए राठौड़ ने कहा, “हमने कभी सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। आप किसी का हाथ पकड़कर उनसे वोट नहीं डलवा सकते। मतदान तो अपनी मर्जी से किया जाता है।”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर जनादेश का अनादर करने का आरोप लगाया और कहा कि पाली में वार्ड के नतीजे आने के बाद निर्दलीय पार्षदों ने खुद भाजपा से संपर्क किया था।
हालांकि, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव के दौरान पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और अन्य सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि तिजारा के कांग्रेस पार्षदों को हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और पूर्व विधायक संदीप यादव को कई घंटों तक हिरासत में रखा गया था।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान श्रीगंगानगर जिले की श्रीविजयनगर नगर पालिका से भी पुलिस और समर्थकों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं।
जूली ने कहा, “यह चुनाव नहीं, बल्कि सरकार की ताकत का इस्तेमाल करके जनादेश पर कब्जा करने की कोशिश है।” उन्होंने कहा, “यह लोकतांत्रिक नियमों का खुला उल्लंघन और सरकारी मशीनरी का सरासर दुरुपयोग है।”
नवंबर 2019 और फरवरी 2021 के बीच हुए पिछले नगरपालिका चुनावों में राजस्थान में 196 शहरी स्थानीय निकायों में 7,500 वार्ड थे। उस समय अध्यक्ष पद के चुनावों के बाद 123 वार्ड में कांग्रेस का, जबकि 64 में भाजपा का बोर्ड बना था।
भाषा
पृथ्वी पारुल
पारुल

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