राजस्थान: किसानों की महापंचायत, इथेनॉल फैक्टरी के लिए हुआ समझौता रद्द करने की मांग

राजस्थान: किसानों की महापंचायत, इथेनॉल फैक्टरी के लिए हुआ समझौता रद्द करने की मांग

राजस्थान: किसानों की महापंचायत, इथेनॉल फैक्टरी के लिए हुआ समझौता रद्द करने की मांग
Modified Date: January 7, 2026 / 04:41 pm IST
Published Date: January 7, 2026 4:41 pm IST

जयपुर, सात जनवरी (भाषा) राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्टरी के विरोध और किसानों पर दर्ज मुकदमों को रद्द करने की मांग को लेकर बुधवार को संगरिया कस्बे की धान मंडी में किसान महापंचायत हुई।

इस महापंचायत में राजस्थान के साथ साथ हरियाणा और पंजाब के किसान नेता व संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे।

‘इथेनॉल फैक्टरी हटाओ-क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले किसान नेताओं ने प्रस्तावित फैक्टरी से जुड़े समझौता ज्ञापन (एमओयू) को रद्द करने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की।

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महापंचायत से पहले किसानों ने नगर परिषद कार्यालय में बने किसान स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

अगली महापंचायत 11 फरवरी को हनुमानगढ़ जिले तलवाड़ा झील गांव में होगी। किसान नेताओं ने महापंचायत में कहा कि प्रस्तावित इथेनॉल कारखाने से क्षेत्र की खेती, भू-जल और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना किसानों की सहमति के ऐसे उद्योग लगाए जा रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

किसान जत्थेबंदी (उग्राहां) के वरिष्ठ नेता जोगेंद्र सिंह उग्राहां ने कर्ज माफी और किसानों-मजदूरों की बदहाल आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “सरकार की नीतियां आम जनता के लिए नहीं बल्कि बड़े औद्योगिक घरानों के हित में बनाई जा रही है।”

उग्राहां ने कहा, “वर्ष 2012 से 2018 के बीच औद्योगिक घरानों का 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज माफ किया गया जबकि किसानों पर कुल कर्ज लगभग 12 लाख करोड़ रुपये ही है। अगर सरकार चाहती तो इसी राशि से देश के सभी किसानों का कर्ज पूरी तरह समाप्त कर सकती थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।”

उन्होंने कहा, “किसानों की कर्ज माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी समय की सबसे बड़ी जरूरत है। देश में धन की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ सरकार की इच्छाशक्ति की।”

उग्राहां ने मजदूरों के कर्ज को भी पूरी तरह खत्म करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार किसानों और मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेगी तब तक संघर्ष जारी रहेगा और किसान-मजदूर सड़क से संसद तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी भी किसान को डराने या दबाने की कोशिश की गई, तो पूरा हनुमानगढ़ जिला एकजुट होकर विरोध करेगा।

राष्ट्रीय किसान संगठन प्रदेश अध्यक्ष जसवीर भाटी, सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह व प्रियंका चाहर सहित अनेक किसान नेताओं ने भी महापंचायत में अपने विचार व्यक्त किए।

हनुमानगढ़ के जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने बताया कि महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गई और एहतियातन संगरिया तहसील और उसके दस किलोमीटर के दायरे में मंगलवार शाम से ही इंटरनेट बंद कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि कस्बे में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। भाषा बाकोलिया पृथ्वी जितेंद्र

जितेंद्र


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