राजस्थान सरकार ‘एक राज्य, एक चुनाव’ के बहाने पंचायत चुनावों में कर रही है देरी : डोटासरा

राजस्थान सरकार ‘एक राज्य, एक चुनाव’ के बहाने पंचायत चुनावों में कर रही है देरी : डोटासरा

राजस्थान सरकार ‘एक राज्य, एक चुनाव’ के बहाने पंचायत चुनावों में कर रही है देरी : डोटासरा
Modified Date: January 21, 2026 / 12:02 am IST
Published Date: January 21, 2026 12:02 am IST

जयपुर, 20 जनवरी (भाषा) कांग्रेस की राजस्थान इकाई ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार एक राज्य, एक चुनाव के नाम पर जानबूझकर पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों में देरी कर रही है।

पार्टी ने कहा कि इस कदम से जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप हो गए हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कमजोर हुई हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों में चुनाव नहीं हो सके क्योंकि उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 तक मान्य है, जिससे एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा “अव्यावहारिक” हो जाती है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि आधिकारिक समय सीमा बीत जाने के बावजूद किसी भी जिले में वार्ड परिसीमन सूची का अंतिम प्रकाशन पूरा नहीं हुआ है, जिसके कारण मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी अटक गई है।

डोटासरा ने कहा, “यह साफ तौर पर दिखाता है कि राज्य सरकार की पंचायत चुनाव कराने की कोई मंशा नहीं है।”

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पंचायत चुनाव न होने के कारण केंद्र ने राजस्थान को लगभग 3,000 करोड़ रुपये की निधि रोक दी है और आरोप लगाया कि अब राज्य सरकार नियमों का उल्लंघन करते हुए जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रही है।

वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया बिना किसी राजनीतिक दखल के निर्वाचन आयोग द्वारा की जाती है।

राठौड़ ने डोटासरा पर पलटवार करते हुए कहा कि वह बोलते पहले हैं और सोचते बाद में, इसी कारण उनके बयान स्तरहीन और असंसदीय होते जा रहे हैं।

राठौड़ ने आरोप लगाया कि डोटासरा द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा उनकी हताशा को दर्शाता है।

उन्होंने पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद परिसीमन को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर कहा कि परिसीमन कभी भी राजनीतिक आधार पर नहीं होता।

भाजपा नेता ने कहा कि परिसीमन पूरी तरह निर्वाचन आयोग द्वारा कराया जाता है, इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।

भाषा बाकोलिया पृथ्वी जितेंद्र

जितेंद्र


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