राजस्थान उच्च न्यायालय ने निगम पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया
राजस्थान उच्च न्यायालय ने निगम पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया
जोधपुर, 21 सितंबर (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने विभिन्न नगर निगमों के महापौर के चुनाव से पहले पार्षदों और उम्मीदवारों को गिरफ्तारी से तत्काल संरक्षण देने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर रविवार देर रात सुनवाई की।
राजस्थान उच्च न्यायालय के इतिहास में इस तरह का यह पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें एक मामले की कार्यवाही सोमवार तड़के करीब दो बजे तक चली। अदालत ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।
ये याचिकाएं कई पार्षदों और उम्मीदवारों ने इस आशंका के बाद दायर की थीं कि चुनाव से ठीक पहले उनके खिलाफ दर्ज मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जिसकी वजह से वे अपना वोट डालने या चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर इन मामलों की सुनवाई के लिए रविवार को विशेष पीठ गठित की गई थीं।
जिन मामलों पर सुनवाई हुई, उनमें बीकानेर के वार्ड 18 से कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद का मामला भी शामिल था। वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य द्वारा उनकी ओर से दायर याचिका पर, उच्च न्यायालय ने अहमद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि उन्हें मतदान में भाग लेने की अनुमति दी जाए।
इस मामले की सुनवाई रविवार को न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल ने की। याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस ने अहमद को एक पुराने विवाद से जुड़े मामले के संबंध में पूछताछ के लिए समन भेजा था। अदालत के समक्ष यह आरोप लगाया गया कि इस कदम का उद्देश्य उन्हें चुनाव में वोट डालने से रोकना है।
उच्च न्यायालय ने रविवार रात करीब 11:15 बजे अहमद को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया।
इससे पहले दिन में, अदालत ने नागौर जिले की कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष व पार्षद तेजपाल मिर्धा और श्रीगंगानगर की श्रीविजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुशील मूंदड़ा को भी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश

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