राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने आरजीएचएस में व्यवधान का संज्ञान लिया

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने आरजीएचएस में व्यवधान का संज्ञान लिया

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने आरजीएचएस में व्यवधान का संज्ञान लिया
Modified Date: May 2, 2026 / 12:14 am IST
Published Date: May 2, 2026 12:14 am IST

जयपुर, एक मई (भाषा) राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत दी जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं में कथित व्यवधान पर स्वतः संज्ञान लिया है।

आयोग ने कहा है कि राज्य कर्मचारियों को इलाज से वंचित करना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

आयोग ने एक मई को जारी आदेश में कहा कि आरजीएचएस का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इसके क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और दवा विक्रेता कथित रूप से लाभार्थियों को सेवाएं देने से इनकार कर रहे हैं, जिसमें इलाज और दवाएं शामिल हैं।

आयोग ने उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है जिनमें बताया गया है कि सेवा प्रदाताओं का लगभग 2,200 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले आठ से नौ महीनों से लंबित है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इसके चलते कई अस्पतालों ने कथित तौर पर सेवाएं वापस ले ली हैं और कुछ लाभार्थियों को अपने खर्च पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य कर्मचारियों को समय पर चिकित्सा सुविधा से वंचित करना उनके मौलिक मानवाधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने राज्य के वित्त विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, आरजीएचएस अधिकारियों तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, जयपुर को नोटिस जारी कर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे आपसी समन्वय से लंबित मुद्दों का समाधान करें और यह सुनिश्चित करें कि लाभार्थियों को योजना के तहत बिना किसी बाधा के चिकित्सा सुविधाएं और दवाएं मिलती रहें।

भाषा

पृथ्वी रवि कांत


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