राजस्थान: जर्जर स्कूल भवनों पर सख्ती, तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश

राजस्थान: जर्जर स्कूल भवनों पर सख्ती, तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश

राजस्थान: जर्जर स्कूल भवनों पर सख्ती, तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश
Modified Date: July 7, 2026 / 07:37 pm IST
Published Date: July 7, 2026 7:37 pm IST

जयपुर, सात जुलाई (भाषा) राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालय शिक्षा विभाग ने जर्जर भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (विद्यालय शिक्षा) राजेश यादव ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि जर्जर घोषित विद्यालय भवनों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल ध्वस्त कराया जाए और किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों की कक्षाएं ऐसे भवनों में संचालित नहीं की जाएं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शिक्षा संकुल में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, वहां बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाई भी नहीं कराई जाए।

यादव ने कहा कि ऐसे विद्यालयों में तत्काल सुरक्षित और वैकल्पिक स्थानों पर कक्षाओं की व्यवस्था की जाए ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो व विद्यार्थियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने बताया कि अदालत के निर्देशों के अनुसार प्रदेशभर में जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है और चिन्हित भवनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया जाएगा तथा विद्यार्थियों को सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (केजीबीवी), स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल विद्यालय, पीएम जनमन, विशेष श्रेणी के विद्यालय, राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) और विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए।

बैठक में राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक श्वेता फगड़िया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रस्तावित राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) की स्थापना और अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी।

वहीं, राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने अधिकारियों को अन्य राज्यों के एसएसएसए मॉडल का अध्ययन करने की सलाह दी।

भाषा बाकोलिया जितेंद्र

जितेंद्र


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