राजस्थान : रेडियो कॉलर लगाने के बाद बाघिन को मुकुंदरा हिल्स अभयारण्य में छोड़ा गया

राजस्थान : रेडियो कॉलर लगाने के बाद बाघिन को मुकुंदरा हिल्स अभयारण्य में छोड़ा गया

राजस्थान : रेडियो कॉलर लगाने के बाद बाघिन को मुकुंदरा हिल्स अभयारण्य में छोड़ा गया
Modified Date: February 22, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: February 22, 2026 4:54 pm IST

कोटा, 22 फरवरी (भाषा) राजस्थान में कोटा स्थित मुकुंदरा हिल्स अभयारण्य में पांच हेक्टेयर के बाड़े में रखी गई एक बाघिन को बेहोशी का इंजेक्शन देने के बाद रेडियो कॉलर लगाया गया और फिर 21 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा गया, ताकि उसे वन क्षेत्र में अनुकूलन के लिए चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जा सके।

‘एमटी-7’ नाम की मादा शावक को उसकी मां की मौत के बाद रणथंभौर बाघ अभयारण्य से बचाया गया था। इसके बाद, उसे और एक अन्य शावक को अभेदा जैविक उद्यान ले जाया गया था, जहां दोनों को लगभग 22 महीनों तक कड़ी निगरानी में रखा गया था और उनमें शिकार करने की प्राकृतिक प्रवृत्ति विकसित करने के लिए विभिन्न जीवों को उनके संपर्क में लाया गया था।

शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बाद में मादा शावक को मुकुंदरा हिल्स अभयारण्य में पांच हेक्टेयर के बाड़े में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसने लगभग 14 महीने बिताए। इस अवधि के दौरान उसने जंगल के माहौल में ढलने के साथ-साथ शिकार करने के कौशल और प्राकृतिक व्यवहार का प्रदर्शन किया।

विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के विशेषज्ञों की एक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वन्य जीव के व्यवहार, शिकार करने के कौशल एवं अनुकूलन क्षमता का आकलन किया।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि विस्तृत मूल्यांकन और क्षेत्रीय निरीक्षण के बाद एनटीसीए ने बाघिन को जंगल के माहौल में ढालने और वहां छोड़ने की योजना के चरणबद्ध कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी।

इसमें कहा गया है कि पहले चरण में बाघिन को पांच हेक्टेयर के बाड़े से निकालकर 21 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया जाना शामिल है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्य वन्यजीव वार्डन से मंजूरी मिलने के बाद मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य के फील्ड निदेशक द्वारा गठित एक समिति ने मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार इसे पूरा किया। इस टीम में फील्ड अधिकारी, अनुभवी पशु चिकित्सक और वन्यजीव विज्ञानी शामिल हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि बाघिन को शनिवार शाम साढ़े पांच बजे बेहोशी का इंजेक्शन देने के बाद रेडियो कॉलर लगाया गया और फिर 21 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ दिया गया। बाड़े में छोड़े जाने से पहले उसके स्वास्थ्य संबंधी मानक भी रिकॉर्ड किए गए।

विज्ञप्ति के मुताबिक, बाघिन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इसमें कहा गया है कि मुख्य वन्यजीव संरक्षक बड़े बाड़े में बाघिन के व्यवहार और प्रदर्शन के अलावा विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर उसे प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ने के बारे में अंतिम फैसला लेंगे।

अधिकारियों ने इस कदम को क्षेत्र में वन्यजीवों के पुनर्वास और बाघ संरक्षण संबंधी प्रयासों में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया है।

भाषा पारुल सुभाष

सुभाष


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