जयपुर, 15 जून (भाषा) राजस्थान को ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ योजना के तहत 11,581 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन मिलेगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नयी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का स्थान लेगी और इसे एक जुलाई, 2026 से देशभर में लागू किया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के तहत राजस्थान को अंतरिम रूप से 7,581 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन अंतिम रूप से तय किया है, जबकि राज्य सरकार अतिरिक्त 4,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी।
आवश्यकता और मांग के आधार पर राज्य के लिए आवंटन राशि में और वृद्धि की जा सकती है।
इसके साथ ही, इस योजना के तहत राजस्थान के लिए कुल व्यय 11,581 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा, जो राज्य में ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन होगा।
बयान में कहा गया है कि ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ नामक यह नयी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर, समावेशी और सशक्त बनाकर उसे मजबूत करने में सहायक होगी।
इस योजना के तहत अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक पात्र ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी, ताकि कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार इसके लाभ से वंचित न रहे।
नयी व्यवस्था के तहत मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा, जो पहले 15 दिनों के भीतर भुगतान की व्यवस्था के स्थान पर लागू होगा।
मजदूरी की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक या डाकघर खातों में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित होगा।
बयान के अनुसार, नयी अधिनियम व्यवस्था के तहत नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक ई-केवाईसी पूर्ण कर चुके मौजूदा मनरेगा जॉब कार्ड वैध बने रहेंगे।
भाषा
पृथ्वी रवि कांत