औपनिवेशिक प्रतीकों व स्मारकों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग गठित किए जाने की राज्यसभा में मांग

औपनिवेशिक प्रतीकों व स्मारकों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग गठित किए जाने की राज्यसभा में मांग

औपनिवेशिक प्रतीकों व स्मारकों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग गठित किए जाने की राज्यसभा में मांग
Modified Date: August 5, 2026 / 10:03 pm IST
Published Date: August 5, 2026 10:03 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को भाजपा के एक सदस्य ने औपनिवेशिक प्रतीकों, स्मारकों और अप्रासंगिक कानूनों की गहन समीक्षा के लिए एक राष्ट्रीय आयोग गठित किए जाने की मांग की।

भाजपा सदस्य दिनेश शर्मा ने विशेष उल्लेख के जरिए यह मांग की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी भारत औपनिवेशिक मानसिकता से उबर नहीं पाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के कई देश गुलामी की मानसिकता के प्रतीकों को बहुत पहले मिटा चुके हैं। पोलैंड और बाल्टिक देशों ने साम्यवादी और सोवियत निशानों को सार्वजनिक स्थानों से उखाड़ दिया वहीं चीन ने जापानी आक्रांताओं के हर निशान को मिटा दिया और वहां के पाठ्यक्रम में जापान को एक आक्रांता के रूप में पढ़ाया जाता है।’’

शर्मा ने कहा, ‘‘आज भी दिल्ली की प्रमुख सड़कें अकबर रोड, बाबर रोड, हुमायूं रोड, तुगलक रोड आदि आक्रांताओं के नाम से जानी जाती है।’’ उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज के अनगिनत वीर सिपाहियों, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, अशफ़ाकउल्ला खान, बेगम हजरत महल, राणा प्रताप, बिरसा मुंडा आदि को भी सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी न्याय प्रणाली में आज भी ‘माई लॉर्ड’ जैसी औपनिवेशिक शब्दावली का प्रयोग हमारी मानसिक दासता को दर्शाता है जिससे उबरने के लिए मेरा सुझाव है कि सरकार एक राष्ट्रीय आयोग बनाए जो अपने औपनिवेशिक प्रतीकों, स्मारकों और अप्रासंगिक कानूनों की गहन समीक्षा करे।’’

शर्मा ने कहा, ‘‘पाठ्यक्रमों और संग्रहालयों में इन आक्रांताओं को आक्रांता ही बताया जाए, ना कि शासक। साथ ही आक्रांताओं के नाम के सभी स्मारक हटाए जाएं।’’

विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा के अशोक कुमार मित्तल ने विदेशों में बसे भारतीय लोगों पर बढ़ते नस्ली हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब और देश के अन्य क्षेत्रों से हर साल लाखों लोग सुनहरे भविष्य के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन सवाल है कि क्या भारतीय नागरिक वहां सुरक्षित हैं।

मित्तल ने कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया और एक प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की। उन्होंने एक मजबूत वैधानिक ढांचा बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया जिसके तहत विदेशों में भारतीय लोगों को जरूरत पड़ने पर तत्काल कानूनी सहायता, वित्तीय सहायता और संकट के समय न्याय व सुरक्षित वापसी की गारंटी मिल सके।

विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा के सतपाल शर्मा ने जम्मू कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष केंद्रीय वित्तीय सहायता दिए जाने की मांग की।

आम आदमी पार्टी (आप) के संत बलवीर सिंह, भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, माया नारोलिया, मनोनीत सतनाम सिंह संधू और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने भी विशेष उल्लेख के जरिए अपने-अपने मुद्दे उठाए।

भाषा अविनाश पवनेश

पवनेश


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