राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए: कांग्रेस
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए: कांग्रेस
जयपुर, 11 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शनिवार को इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने इसे ‘आस्था के नाम पर लूट’ का मामला बताया।
उपाध्याय ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘भगवान राम के नाम पर जुटाई गई निधि भाजपा-आरएसएस के लिए राजनीतिक लूट का साधन बन गई है।’’
इस मुद्दे को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।’’
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष राम मंदिर के चंदा प्रबंधन व्यवस्था में कथित आर्थिक अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग कर रहा है।
जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए उपाध्याय ने कहा, ‘‘जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो चढ़ावा चोरी की जवाबदेही कौन लेगा?’’
कांग्रेस प्रवक्ता ने चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े का भी ज़िक्र किया।
उन्होंने पूछा, ‘‘अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए? अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?’’
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि चढ़ावे और खर्चों के प्रबंधन और आर्थिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उपाध्याय ने कहा, ‘‘ फर्ज़ी रसीदों, नकद चढ़ावे और दूसरी आर्थिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। फिर भी, कार्रवाई सिर्फ़ निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई है जो चिंता की बात है। मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई है।’’
इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘देश यह जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों हैं। पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस कथित लूट के पीछे कौन लोग हैं और किसके संरक्षण में यह सब वर्षों तक चलता रहा।’’
यह विवाद सात जून को तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप लगाया। मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि ‘‘मौजूदा आंतरिक ऑडिट के दौरान कोई खास गड़बड़ी सामने नहीं आई।’’
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर राम मंदिर में चढ़ावे के तौर पर मिली नकदी और कीमती सामान की गिनती करने वाले आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। बाद में राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
उपाध्याय ने कहा, ‘‘इस मामले में शामिल प्रभावशाली लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों और स्वतंत्र सदस्यों के साथ एक नया, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए।
उपाध्याय ने कहा, ‘‘भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं। भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट और उस पर पर्दा डालने की हर कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।’’
भाषा पृथ्वी संतोष शोभना
शोभना

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