सिलचर, 28 जुलाई (भाषा) असम के दीमा हसाओ जिले के जंगलों में फूलों वाला एक दुर्लभ पौधा ‘रुंगिया मास्टर्सी’ लगभग 180 साल बाद फिर से देखा गया है। शोधकर्ताओं ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
असम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं देबज्योति भट्टाचार्य और कंगन कुमार दास की टीम ने यह पौधा देखा। इस पर आधारित शोध लेख हाल में एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
दीमा हसाओ की जटिंगा पहाड़ियों में दिखे इस पौधे की पहचान इसके हल्के हरे और सफेद रंग के फूलों से होती है, जिन पर बैंगनी रंग के बेहद महीन डिजाइन बने होते हैं।
वर्ष 1845 में जे डब्ल्यू मास्टर्स ने असम के एक अज्ञात स्थान पर सबसे पहले फूल वाले इस पौधे की खोज की थी।
शोधकर्ताओं ने कहा कि लगभग दो शताब्दियों बाद ‘रुंगिया मास्टर्सी’ का फिर से दिखाई देना पूरे पूर्वोत्तर भारत और खासकर असम की समृद्ध वनस्पति विविधता को दर्शाता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि यह प्रजाति अभी भी बहुत सीमित क्षेत्रों में ही पाई जाती है और इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इसलिए जहां-जहां यह पौधा अभी मौजूद हो सकता है, उन स्थानों की पहचान करने और इस (पौधे) पर मंडरा रहे संभावित खतरों का आकलन करने के लिए व्यापक सर्वेक्षण की तत्काल जरूरत है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इससे तथ्यों के आधार पर योजना बनाने और इस पौधे के संरक्षण के लिए उचित प्रबंधन उपाय लागू करने में मदद मिलेगी।
भाषा जोहेब पारुल
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